Last seen: May 3, 2026
अब बीजक के चिन्ह देखे! पहले गिने, ये कुल चौबीस थे! इसमें तारे, चन्द्र, सूर्य, और तीन ग्रह बने थे! ये शायद, और देखा जाए तो आँखों से देखे जाने वाले ग्रह...
मध्य, और जैसे ही मिट्टी रखी, और मंत्र पढ़ा, उसमे से धुंआ निकलने लगा, और सफ़ेद सफ़ेद झाग सा उठने लगा, और वो झाग सा फैलने लगा उस त्रिकोण के मध्य ही! जब ...
वो भी उसके संग खड़ी हो गयी! हम रुक गए थे तभी! उनके हाथ खाली थे उस समय! "डरो नहीं!" मैंने कहा, दरअसल वो पीछे हुए जा रही थीं! धीरे धीरे! मुझे कहना पड़ा!...
देर लगी! "ये कोई लूटपाट का मामला नहीं लगता मुझे तो वे बोले, "है ही नहीं" मैंने भी समर्थन किया, "लूटपाट में तो सब लूट लेते वो, यहां कई लाशों के शरीर पर...
वो! रंग बेहद साफ़ था उनका, और उम कोई पच्चीस बरस के आसपास होगी उन दोनों की! हम थोड़ा करीब आये उनके, तो एक की नज़र हम पर पड़ी। उसने दूसरी को कुछ कहा, और...
बोले, "हाँ, मुझे कोई व्यक्तिगत शत्रुता लगती है ये" मैंने कहा, "हाँ कोई रंजिश" वे बोले, "हाँ, उसी का फल है ये नरसंहार" मैंने कहा, "वो क्या है?" मैंने द...
"एक मिनिट! यहां आइये, जल्दी!" वे बोले, "कुछ है क्या?" मैं आगे बढ़ता हुआ बोला, "आइये तो सही?" वे बोले, और मैं पहुँच गया वहां! "ये क्या है?" मैंने स्...
वो मूर्ति थी या नहीं, कुछ कहा नहीं जा सकता था, उसके हाथ तोड़ दिए गए थे, किसकी है, ये भी नहीं पता था, औंधी पड़ी थी, नग्न-स्वरुप था उसका, केश पीठ पर ही ...
रही थी हमसे! धमका रही थी! दुबारा न आने को कह रही थी! "यहां कोई गड़बड़ है" वे बोले, "हाँ, बहत बड़ी" मैंने कहा, हम वहीं देख रहे थे। एकटक! "लेकिन यहां है...
और पुलिस ने वहाँ लगे बोर्ड से उनका नंबर निकाला था, इस तरह खबर लगी थी उनको... अब मैं सोच में पड़ा, बाबा मोहन अच्छे-खासे, तांत्रिक थे, लेकिन वे भी चपेट ...
हल्का-फुल्का खाया हमने, और हम कोई दस बजे, बाबा रमिया के स्थान के लिए निकल पड़े, बाबा अरु भी साथ ही चले, वहां पहुंचे, तो पता चला कि बाबा रमिया तो महीने...
मुझे, और खड़ी हो गयीं! अब बाबा खड़े हए, मैं भी खड़ा हुआ! "मालिश करवा लो, फिर आराम से बैठेंगे!" बाबा ने कहा, हँसते हुए! मुझे भी हंसी आ गयी! "नहीं बा...
आंसू पोंछे उसने! "उस से मिलना, लेकिन कुछ ऐसा मत करना कि हम सबकी इज़्ज़त खराब हो" मैंने साफ़ साफ़ का दिया था। वो चुप थी! "समझ में आया या नहीं" मैंने कह...
कुर्ते और पाजामी में गज़ब लग रही थी पूनम! मैंने उसको घुमा-फ़िराक देखा, कुरता जंच रहा था उस पर! और इस तरह हम कोई नौ बजे से पहले, हरिद्वार जाने के लिए त...
मैंने कहा, उसने सर हिलाकर हाँ कहा! भोली-भाली है ये पूनम! अधिक पढ़ी-लिखी नहीं है! गाँव की है, लेकिन रूप-रंग में किसी से कम नहीं! देह ऐसी कि कोई भी देखे...
