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तेज तेज कदमों से! मैंने आवाज़ भी दी, लेकिन नहीं ठहरा वो! जैसे डर गया था वो! "बाबा लहटा!" मैंने कहा, "हाँ, और वो मदना बेटा है उनका!" वे बोले, "अब सारी ...
करवा दें खुदाई! मैं उठा, और शर्मा जी के पास तलक गया, मुंह में अभी भी उस सड़ांध के कण चिपके थे, मुंह बकबका सा हो गया था, मेरी आँतों में जैसे अंतःसाव सा...
एक थोड़ा सा हिली, मुझे देखा, आँखों में काजल लगा था, और सच में, बहुत सुंदर चेहरा था उसका,ठुड्डी पर गोदना कढ़ा था! रंग गोरा था, होंठ लाल थे, उम में, चेह...
और शर्मा जी के पास पहुंचा, वे भी हतप्रभ थे! वहीं, उसी गड्ढे को देख रहे थे, टकटकी लगाए हुए! "मुझे समझ में नहीं आया कुछ!" वे बोले, "मुझे भी" मैंने कहा, ...
वापिस जा!" वो बोला, उसने नहीं नहीं शब्द बहुत तेज बोले थे, और बाकी में आवाज़ की आवृति धीमी होती गयी थी, वापिस जा में तो जैसे वो रोही पड़ा था!! मैं आगे ...
कटे सर की आवाज़!! अब जान गया! "मदना!" मैंने कहा! वो हंसा!! ठहाका मारा उसने! "हाँ! मदना!" वो बोला, अब मैंने वक़्त गंवाना ठीक नहीं समझा! फौरन ही काम ...
क्योंकि मिट्टी बाहर आ रही थी! तभी हड्डी टूटने की सी आवाज़ आई! और कोई चार-पांच पसलियां टूट गयीं, बाहर निकल आयीं! पसलियां देखकर पता चलता था कि कोई जवान ...
गुस्सा आ गया था उस पर! मैंने तभी उत्त्वाल-मंत्र का जाप किया! और नीचे बैठ कर, मिट्टी उठा ली! अब वो सर घूमा! न जाने कैसे घूमा! जैसे गेंद ज़मीन पर उछला क...
रहा था, कि किसी ने उस सुरंग में से अपना सर निकाला, हमें देखा, एक पल को तो मैं भी डर गया था! सोच के देखिये, आप ऐसे देख रहे हों, और कोई उस सुरंग में से ...
अब शर्मा जी आगे आ गए! "ये क्या हुआ?" वे बोले, "देखते रहो!" मैंने कहा, मुझे उम्मीद थी कि कुछ न कुछ तो होगा ही वहाँ! और वही हुआ! भम्म से ज़मीन हिली! ...
आखिर में थके-मांदे से हम वापिस आ गए! खाली हाथ! कुछ हाथ नहीं लगा, न ख़ाक़ न धूर! थकावट हुई सो अलग! अब आराम किया हमने वहां! लेटे तो नहीं, हाँ कमर लगाने ...
और हम चलते रहे, नज़रें गढ़ाए आसपास!! हम चले जा रहे थे आगे! रास्ते में जंगली बिल्लियों दौड़ी जा रही थीं! सीविट जाति की बिल्लियाँ थीं वो! लड़ने में बहुत...
आकाश में दिखाई देते हैं, बृहस्पति । कभी कभार ही, तो ये बीजक उस समय के आकाश का नक्शा था, सूर्य छिप रहे थे, शाम रही होगी उस दिन, बहस्पति आकाश में हों...
से लगते हैं, मैं ऐसी ही एक शाख के पत्तों को छू रह था। मेरे पास पानी की बोतल थी, मैंने पानी पिया, शर्मा जी बैठ गए थे वहीं, वो बीजक एक तरफ रख दिया था! अ...
आना" वो बोला, धमकी दी थी उसने हमें साफ़ साफ़! मैं चाह रहा था कि बात आराम से हो जाए! नहीं तो ये रतन सिंह मुंह की ही खाता! धरा रह जाता उसका खंजर और उसका...
