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और मंगल, एक एक कौर खाता रहा!! उसकी आँखों में देखते हए! भोजन हो गया! फिर हुई रात्रि! और मंगल, उसके संग, चिपक कर, सो गया फिर! सारी रात मेघ गरजते रहे!...
'मैं नहीं हो, तो प्रेम, प्रेम होता है! यही है प्रेम, यदि मैं गलत है, तो गलत ही सही! उस बरसात में, ठंडक थी, और मंगल काँप जाता था कभी कभी! जब भी काँपता,...
कोने में, और टुकुर टुकुर, जैसे उन्ही दो प्रेमियों को देखे जा रहे थे! उनमे से कोई कम नहीं था! एक तो वैसे ही पागल था, और उस पागल की वो प्रेमिका, वो तो अ...
. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . ओह! मैं उठा! नहीं हुआ बर्दाश्त! बाहर आया...
और वो पर्वत! खुद चल के आये और उस कण को, आत्मसार कर ले! वाह मंगल! कम से कम, मैं नहीं कर सकता ये! मैं, प्रपंची! सतत आगे बढ़ने को लालायित! तेरा मुकाबला? ...
जवाब सुन, फिर से चुप! कुछ न बोले! ऊपर देखा उसने, और आँखें जा टकराई उसकी, उस बुधवि से! और फिर. मित्रगण! आपको एक बात बताता है, एक विलक्षण भरी बात, बा...
छूते हुए बोला उन्हें! "मेरे हैं" वो बोली, "लेकिन तुम्हारे घर वाले?" उसने पूछा, "यहीं हैं" वो बोली, "कहाँ?"वो बोला, "यहीं" वो बोली, हँसते हुए! वो यह...
तो वही लिखता! अफ़सोस! नहीं हैं। ये प्रेम भी कैसा? इसका अर्थ भी नहीं है मेरे पास,न ही वो सटीक शब्द! ये तो मैं आपके अन्तःमन से ही काउंगा कि प्रेम की सर्...
और भुजाओं में और गठन जागी! अपना चेहरा, उस बुधवि ने रख दिया था मंगल के कंधे पर! मंगल, न रोक सका अपने आपको, आंसू, बहने ही वाले थी कि, कुछ शब्द मुंह से न...
चुकी थी। उसने, तभी के तभी, मंगल को भींच लिया अपने अंदर! अपनी भुजाओं में! मंगल को स्पर्श मिला, तो उसने भी उसको आलिंगनबद्ध कर लिया! "हाँ, आउंगी!" वो बोल...
"तुमने बुलाया मुझे, मैं आ गयी" वो बोली, "मैं जब भी बुलाऊंगा तुझे, तू आ जायेगी?" पूछा उस भले पागल ने! "हाँ!" वो बोली, "अच्छा! अच्छा! एक बात बता, तेरा ग...
रहा था मंगल! सोते सोते! कहीं देखा है ऐसा प्रेम? नहीं! मैंने तो कहीं नहीं देखा! सुना? हाँ सुना! एक था मंगल! ऐसा ही एक प्रेमी! और तभी उसके सर पर किसी...
और भेज देता वापिस, किसी से कुछ लेता नहीं था, न पैसा, न भोजन और न ही कपड़ा! वो सब तो बुधवि ले ही आती थी! उस रोज, अकेला था मंगल! दोपहर से पहले का समय था...
स्त्री उस मंगल को देखते ही रह गयी! दैदीप्यमान चेहरा, बदन से एक तेज फूटता हुआ, मुख पर आभा-मंडल! "कैसे आयीं मौसी?" बोला मंगल, "तु मंगल ही है न?" उस स्त्...
"मेरा भी, मन नहीं लग रहा" वे बोले, "अब मन करता है की अभी जाऊं और वो मंदिर देखू!" मैंने कहा, "हाँ, सच कह रहे हो आप" वे बोले, "मंगल!" मेरे मुंह से निकला...
