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अपनी मनोदशा से कौन अनजान रहता है भला! जा पहुंची कुँए! गंगा ने घड़ा रखा वहीं और चल पड़ी उस अंधे कुँए के पास! "कहाँ चली?" बोली माला! "आ जाउंगी' बोली गंग...
और चल पड़ा गाँव की ओर! अब भागी माला अंधे कए पर बैठी गंगा के पास! "गंगा? औ गंगा?" बोली वो! "हाँ?" बोली गंगा! "वो नहीं आएगा आज" बोली माला! "तुझे कैसे पत...
तो अपने बदन में ही स्पर्श महसूस हो किसी का! ये कैसी लगी! कैसे करके रात काटी! सुबह हुई! सुबह भी, बदन सुस्ताया जैसा! अलसाया जैसा! सुबह से ही, अक्स सामने...
माँ के संग!" बोला वो! "ये हुई न बात!" बोली माला! "हाँ माला, इस से दूर नहीं रहा जाता मुझे अब!" बोला वो! "रहा तो इस से भी नहीं जाता। दिन भर बिस्तर में ल...
आ गया पास! उतरा! और आया गंगा के पास! "पानी!" बोला वो! अब घड़ा किया आगे उसने। और पिलाया पानी! पानी पिया उसने, अपना चेहरा धोया। और फिर पौंछा! "कैसे ह...
"देखते हैं!" छेड़ा फिर से माला ने! पहुंच गयीं घर! घर में पिता जी थे, जाने वाले थे अपने व्यापार के काम से बाहर, संग उनके, वो उदयचंद भी था! उसने भी काम ...
और घोड़े पर बंधी हुई एक पोटली दे दी माला को! "पसंद आएंगे तुझे!" बोला वो! माला से रहा न गया! खोल ली पोटली! बहूत शानदार कपड़े लाया था माला के लिए! चार ज...
कैसे जायेगा ये?" बोली माला! दिल धक्क!! दिल में धड़कन बढ़ी! संशय तो सही था! वो क्षेत्र वैसे भी डकैतों के अधीन था! कई दस्यु वहाँ सक्रिय थे! लूट-पाट और ड...
और उठ गयी माला वहाँ से! कोई हल नहीं निकला! और फिर दोपहर हुई! कुछ लोग आये थे घर में! अनमने मन से, दो महिलाओं से मिली गंगा! माला के साथ, और साफ़ साफ़...
श्रृंगारदानी थी वो! उसने बंद किया जैसे ही उसे,माला आ धमकी अंदर! "दिखा, मुझे भी दिखा न?" बोली माला! गंगा न छोड़े उसे! छीनाझपटी सी होने लगी! और तभी जमना...
और गंगा के होंठ फैले! पहली बार!! "गंगा?" बोला वो! कुछ न बोली फिर भी! "ए गंगा!" बोला भूदेव! सर उठाया! और आँखों में झाँका भूदेव की! अंदर तक, सिहर सा गया...
और कुछ ही देर बाद, वो घुड़सवार वहीं रुक गया! घोड़े से उतरा, अपने घोड़े को लाया, नांद तक, माला ने पानी भरना शुरू किया नांद में! और वो भूदेव, चला उस गंग...
उसने! गंगा, लरज गयी थी! शायद अचेत ही हो जाती, अगर संभालता नहीं वो भूदेव तो! उसने तब संभाल कर खड़ा किया गंगा को! माला सब देखती रही। आखिर में, गंगा ने स...
और हाथ खोला! वो माला!! उस भूदेव की माला!! सफ़ेद, मोतियों की माला! लगा ली गले से! क्या सुंदर दिखे!! पहन ली! पहन ली उसने!! सच में, चार चाँद नहीं, आठ ...
थी! उसकी पूरी कलाई, उसकी मुट्ठी में थी!! गंगा हाथ छुड़ाए! कोशिश करे! लेकिन वो! न छोड़े! न छोड़े! "गंगा! माफ़ करना, लेकिन मैं रोक नहीं सका अपने आप को!"...
