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आँखों में आंसू छलके, उस, उस भूदेव के लिए, जो अब नहीं आना था कभी.. गंगा, भाग ली वहाँ से! आँखों से आंसू टपक रहे थे। साँसें तक जाती कब उसकी, पता नहीं था,...
अब खड़ी हो गयी माला, "चल गंगा" बोली वो, और धड़धड़ाते हुए, चली गयीं बाहर, किसी ने रोका भी नहीं! "गंगा?" बोली माला, "हुं?" बोली गंगा! "कहाँ जा रही है...
गंगा सहारा दे उसे, खड़ा किया, फिर भी,अपने एक पाँव पर टिका रहा भूदेव! "सुन, मेरी बात सुन, तू घर जा अपने, अब आऊंगा तेरे घर, तेरा हाथ मांगने गंगा! और तुझ...
ने चेहरा देखा उस गंगा का! पानी भी नहीं माँगा उसने! गंगा के पास आया, गंगा को देखा, आँखों से बूंदें छलक आयीं आसुओं की! न देखा गया उस से! जा चिपटा उस से!...
बैठ गयी वहीं, सर पकड़ कर! रोने लगी! माँ परेशान! पूछा माँ ने बहुत! सपना! वो सपना! रोई बहुत गंगा.........आशंकाओं में घिर गयी थी....... लेट गयी वहीं, रोत...
"चल माला, पानी भर और चल यहां से" बोला भूदेव! माला ने पानी भरा, गंगा ने भी भरा, और भूदेव चला उनको छोड़ने! गाँव आया, तो मुड़ा, "सुन गंगा! कल नहीं आना तू...
लेकिन जीवट वाला वो भूदेव घबराया नहीं! नहीं घबराया! उसकी गंगा को तंग किया था किसी ने और उसके होते हुए कोई गंगा को तंग करे, ये उसको कहाँ बर्दाश्त होता! ...
आँखों में आंसू दिखे। "क्या बात है गंगा? मुझे बता?? बता मुझे? बता??" घबरा सा गया वो! गंगा न छोड़े उसे! सिसकी ले! "किसी ने कुछ कहा तुझे?" पूछा उसने! न ब...
रख दिया उदयचंद के सीने पर। माँ को अटपटा सा लगा! लेकिन तभी! तभी खांसता हुआ उठा उदयचंद! प्राण बच गए थे उसके! तत्क्षण ही अब तो सभी चिपट गए उस से! उदयचंद ...
लेकिन वो फूल? वो आवाजें? वो भम नहीं था। न ही वहम!! कुछ तो था। कुछ न कुछ तो! यही सोचती हुई, चलती रही गंगा! और माला! उसका उपहास उड़ाती रही! सारे रास्ते!...
फूल?" पूछा माँ ने, "जमना ले गयी" बोली गंगा! "चल ठीक है, मंदिर में चढ़ जाएंगे" बोली माँ! गंगा वापिस हुई, अपने कमरे में अपने वस्त्र उठाये, और चली गयी स्...
गयी घर गंगा! रात को सोते समय उसकी आँख खुल गयी! एक तो नींद आती नहीं थी, आती थी, तो हर करवट में आँख खुल जाती थी! अब ये परेशानी तो खुद ही गले में डाली थी...
पीछे कुछ! न दायें, न बाएं! बस खालीपन का रेगिस्तान और उसकी तपती रेत! कुछ दिन और बीते! कोई दस दिन! पिता जी भी घर आ चुके थे! वो उदयचंद भी! पिताजी खूब ...
सर हिला दिया बस! हाँ में! "मुंह से बोल न?" बोला वो! "हाँ" बोली गंगा! "नहीं सुन पाया!" बोला, अपना कान पास लाकर उसके! "हाँ!" बोली वो "क्या?" पूछा उसने! ...
ज़रूरी है। इसीलिए, तुझसे मिलने आया मैं, कि तुझे बता दूँ!" बोला वो! उसके सर पर लटकती पेड़ की एक शाख को पकड़ कर! एक महीना? गंगा ने ऊपर देखा! आँखें उठायी...
