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मैंने फ़ोन उठाया, तो फ़ोन बाबा मैहर का था! मैंने ही बात की उनसे, अभी तक खबर नहीं मिली थी, बाबा पूरब ने कोई खबर नहीं दी थी उन्हें! अर्थात कोई तिथि निर्...
"आराम करो अभी" बोली वो, और चली गयी! कह आई थी वो चाय के लिए, चाय आई तो मैंने पी, "खाना साथ ही लोगे?" पूछा उसने, "हाँ" मैंने कहा, चाय पी ली थी अब तक,...
"आज ही चलते हैं, ढाई घंटे में पहुँच जाएंगे" बोला मैं, "ठीक है" बोली वो, "तुम तैयार हो जाओ, मैं आता हूँ" बोला मैं, और बाहर आ गया! शर्मा जी को भी तैय...
"हाँ!!" मैंने कहा, "अब छोडो भी!" बोली और खड़ी हुई! एक मदमस्त सी अंगड़ाई ली उसने! मेरी तो नज़रें जा भिड़ी उसके बदन की उस अंगड़ाई पर! कैसे किसी मूर्ति क...
कोलकाता जाना पड़ता! तो श्रुति के आने से, ये समस्या तो हल हो गयी थी! वो मेरे साथ साधनारत रह चुकी थी! वो प्रखर थी, भयहीन थी और अपने साधक के प्रति, पूर्ण...
में। "तो बाबा पूरब भी वहीं होंगे?" पूछा मैंने, "हाँ, यही लगता है।" बोले वो! "ओह.." मैंने कहा, "घबराओ नहीं!! मैं संग हैं आपके!" बोले वो! बहुत राहत पड़ी...
"क्यों?" पूछा उसने! "एक तो दिल मचल रहा है,ऊपर से तुम और घी झोंक रही हो!" बोला मैं! "अच्छा ठीक है, नहीं हंसती!" बोली वो! "हाँ, कुछ राहत तो पड़ेगी!" मैं...
तुम्हारे! बुलाते तो भी आ जाती!" बोली वो! "जानता था!" मैंने कहा! "मैं तैयार हूँ!" वो बोली! "अच्छा, अब कहाँ चलना है, मेरे संग या यहीं रहोगी?" पूछा मैंने...
ऐसा कौन सा पाप कर दिया मैंने?" पूछा मैंने, "आपने मार-पीट की श्रेष्ठ के साथ" बोले वो! "मुझे क्या पागल कुत्ते ने काटा था कि मैं मार-पीट करूँ इसके साथ?" ...
युक्ता ! युक्ता! आँखें फाड़ फाड़ देखे मुझे! मैं खड़ा हुआ! "युक्ता। समझा ले इसे!" मैंने कहा, "जाओ, जाओ यहाँ से?" बोले पूरब बाबा! और तभी बाबा मैहर आय...
भूल नहीं पाया था! और जब अवसर मिला था, तो मेरी समस्त इन्द्रियाँ मेरे विवेक को सरेआम पीट रही थीं! कभी कभार, विवेक को सुला दें पड़ता यही, तो आज मैंने सुल...
खिलखिलाकर! एक जानी-पहचानी सी हंसी! "यहां कैसे?" मैंने पूछा, "चंदा ने बताया होगा" बोली वो! "हाँ, बताया!" मैंने कहा, "और आप कैसे यहाँ?" पूछा उसने! "आया ...
और चल दी! घमंड सर चढ़ के बोल रहा था दोनों भाई बहन के! मैं आगे बढ़ गया फिर! अपने कमरे के लिए! 'कमरे में आया मैं तो शर्मा जी बैठे हुए थे और फ़ोन पर बात ...
"उसका इसमें कुछ लगा है क्या?" पूछा मैंने, "लगा होगा" बोला अंगज, "नहीं, नहीं लगा" बोले बाबा धेमज! "फिर?" अंगज ने पूछा, "ये आद्य-श्मशान उसी के जानकार का...
और हम दोनों, फिर से चल दिए वापिस! बाबा पूरब के पास! पता नहीं किया बात थी! क्या हआ था वहाँ! और हम, जा पहुंचे वहाँ! हम दोनों वहाँ पहुंचे उस सहायक के ...
