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. . . . . "हाँ यार!" मैंने कहा, "ये देखो! एक और!" बोले वो! सच में, काफी बड़े चमगादड़ थे वहां! मैंने नहीं देखे थे ऐसे चमगादड़ आज तक! ...
कर सकते थे। हमने अपना डेरा यहीं डालने का निश्चय किया! और फिर जगह साफ़ की, अब तलक अँधेरा छाने लगा था, दिन भर सूरज की रोधनी से तपे पत्थर, गर्मी बाहर फें...
और तब हम चले! टांगें जवाब दे रही थीं! घुटने चटक चटक कर रहे थे! "मर गए भई!" बोले बाबा! "और ले लो वेलिका!" मैंने कहा, "मुझे क्या पता था!" बोले वो! "न मझ...
और फिर सभी ने देखा! "चला गया!" बोले बाबा! "हाँ, लेकिन उसका घर तो दिख गया!" बोले शर्मा जी! "अरे शर्मा जी! कैसा घर?" बोला मैं! "क्यों? ये रहा न?" बोले व...
उठायी उन्होंने, मैंने बड़ी टोर्च उठायी, सामान वहीं रहने दिया! "सिद्धा, वो छोटा बैग ले ले!" मैंने कहा, उसने उठा लिया! और हम कुलांच भरते हुए दौड़ पड़...
और कशम पक्षी, चुन चुन के खा जाते हैं उन्हें! एक और है, जंगल में होती है वो झाडी, रुपालिका नाम की, पीले फूल खिलाती है! चन्द्र को देख, घूमते रहते हैं फू...
आया उठकर! हाँ, बाबा चंदन और सिद्धा, दोनों ही बेहाल थे! मैं फिर से अंदर आया, तो सिद्धा बैठा हुआ था पेट पकड़ कर! और बाबा चंद लेटे हुए थे, ही-ही करते हुए...
और ले आया चाय! हम चाय पीने लगे आराम से! ग्यारह बजे.......... हम टकटकी लगाए देख रहे थे सामने! घुप्प अँधेरा था! रौशनी जलाते ही, कीट-पतंगे आ धमकते थे! बस...
रात के बजे नौ! आज चाँद भरपूर यौवन में थे! खूब श्रृंगार हुआ था उनका आज! उनकी सहचरियों ने दुग्ध स्नान करवाया था आज उनको! जल में पड़ी कुमुदनी भी अपने प्र...
अब तो मैं खुल के हंसा! पेट पकड़ कर! बाबा चंद भी हंस पड़े! सिद्धा लेट गया हँसते हँसते! शर्मा जी भी हँसते रहे। "आया था साला इंडी पर झंडी बाँधने!" बोले व...
और शालनाथ, हाय! हाय! चिल्लाये! "उठाओ इसको!" कहा मैंने! और फिर मैंने और शर्मा जी ने उठाया उसको! उसके ज़ख्मों से खून रिसने लगा था खड़े होते ही! कभी म...
अवाक रह गए थे वो! "ये यहां सरख पकड़ने आया था?" बोला मैं! बाबा ने कुछ न कहा! "बताया था आपको सुरख के बारे में?" पूछा मैंने। बाबा चुप! "बताओ? जवाब दो?" म...
और बाबा चंदन! वो कांपें! इरें! "पौक्षा?" कहा मैंने! फुकार मारे! "रुक जाओ!" कहा मैंने! "शर्मा जी, सिद्धा! इसको इधर करो!" कहा मैंने! उन्होंने खींच लिया ...
और टिका दिया उसके फन पर! जमीन पर! मंत्र पढ़ते रहे! तेज तेज! बहुत तेज! वो तड़प उठी! बेचारी! शरीर किसी केंचुएं के समान तड़पने लगा! कुंडली मारे! खोले! तड...
और फिर पी हमने चाय! "भिलक कनकी है?" मुझसे पूछा बाबा ने, "हाँ वही है" कहा मैंने। "वाह!" बोले! और जांघ पर हाथ मारा अपनी! फिर हुई रात! और तब मेरा द...
