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"नहीं, मेरा नहीं, बाबा चक्रेश्वर से हुआ था वार्तालाप!" बोले वो, "क्या था वार्तालाप में?" पूछा बाबा ने, "मुझे नहीं मालूम! न बाबा ने बताया ही!" बोले...
मैं आ गया था अपने कमरे में वापिस, और अब महफ़िल जमने का समय था, शरण ने सारा इंतज़ाम बखूबी कर दिया था, आज मछलियाँ लाया था वो, तालाब की मछलियाँ, और बनायी...
"जी" बोली उत्तमा! और फिर उठी उत्तमा, जाने के लिए, मैंने सहारा देकर उठाया उसे, नीचे उतरी बिस्तर से, और पहने अपने चप्पल, और चली गयी बाहर, दरवाज़ा बंद कर...
उसने हाथ पीछे किया और कंगन नीचे कर लिए! "तुम्हे कुछ नहीं होना चाहिए बस!" कहा मैंने, "आप हो न?" बोली वो, "हाँ, हूँ" कहा मैंने, "फिर कैसी चिंता?...
भर चुकी थी मन में! मैंने आँखें मिलायीं उस से, तो आँखें नीचे कर ली उसने! ये लम्हे, ऐसे लम्हे कज़ा से लबरेज़ हुआ करते हैं! उसकी पलकें जो अब आँखों को आधा...
"पूर्णिमा को चलना है!" कहा मैंने, "रात्रि को?" बोली वो, "हाँ" कहा मैंने, "दिख जाएंगे वो?" बोली वो, "हाँ, क्यों नहीं, पूनम का चाँद जो होगा!" कह...
धीरज बंधा दिया बाबा ने मेरा! यक़ीन करने के अलावा कुछ और, किया भी नहीं जा सकता था! करना ही पड़ा! "बस बाबा, मेरी फ़ज़ीहत न हो!" कहा मैंने, "अरे नही...
"हाँ जी!" कहा मैंने! "बाबा भोला खुश हो जाएंगे!" बोले वो! "और उत्तमा भी!" कहा मैंने! बाबा हंस दिए! "उत्तमा का तो पता नहीं, लेकिन बाबा भोला प्रश...
"अच्छा!" बोले वो, और फिर मैंने फ़ोन लगाया कजरी को! डर डर के! कहीं मना ही न कर दे! कहीं बुरा ही न मान जाए! ऐसा हुआ, तो समझो अब कजरी से मिलना ही बंद! ...
"मेरा कोई मतलब नहीं उस से" बोली वो, "तो बोलो तो सही कम से कम?" कहा मैंने, "बोल तो रही हूँ?" बोली वो, "तुम जानो!" कहा मैंने, और खड़ा हो गया मैं...
मैं बैठ गया उसके पास! हाथ देखा उसका, कलाई पकड़ी, तो बुखार नहीं था उसे अब! "अब तबीयत ठीक है?" पूछा मैंने, "हम्म" बोली वो, "अच्छा है!" कहा मैंने, ...
"अच्छा होगा!" कहा मैंने, "अच्छा, चलना है, वहाँ सविता के पास?" पूछा उन्होंने, "हाँ, चलना तो है" बोला मैं, "कब?" पूछा, "चलते हैं बस!" कहा मैंने, ...
"उसको पता है?" बोली वो, "क्या? कि मैं यहां हूँ?" बोला मैं! "हाँ?" बोली वो! "हाँ पता है! फ़ोन पर बताया था उसको!" बोला मैं! हाँ पुरानी जान-पहच...
त्वचा में लालिमा! इतना सुनते ही, मुस्कुरा पड़ी, एक अलग ही अंदाज़ से! "वैसे एक बात है!" कहा मैंने, "क्या?" बोली वो, "ज़िद्दी हो तुम!" कहा मैंन...
"ये ले!" कहा मैंने, और जेब से एक पांच सौ का नोट दे दिया उसको! "अरे नहीं बाबू जी! नहीं नहीं!" बोला वो! "रख ले! रख ले!" कहा मैंने, "नहीं नहीं!" ...
