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'आएगा या नहीं?' पूछा मैंने, 'पता नहीं!' बोली वो, 'ठीक है फिर, दो दिन और सही!' कहा मैंने, तो अब चेहरा ढक लिया उसने! 'अरे उत्तमा! तुम हंसी-ख़ुशी ...
"यहां तो हफ्ता भी नहीं हुआ?" बोली वो, "हाँ ये तो है" बोला मैं, "तो रुक के जाना?" बोली वो, "नहीं रुका जा रहा!" कहा मैंने, "और फिर वो काम?" बोली...
"एक ही बात है, वहां इंतज़ार करना पड़ेगा फिर!" बोला मैंने, "चलो छह ही सही!" बोले बाबा ऋषभ! "ठीक है छह बजे" शर्मा जी बोले, "हाँ, चलो कोई बात नहीं"...
"हाँ, सही कहा आपने!" बोला मैं, "क्या स्वाद है!" बोले वो! "लाजवाब!" कहा मैंने, हम आराम से खाते-पीते रहे! छक कर खाया और पिया! "मजा आ गया!" कहा ...
"निबट गया काम?" बोले वो, "हाँ" कहा मैंने, "अच्छा हुआ!" बोले वो! "हाँ, आवश्यक भी था!" कहा मैंने, "अब बुलाऊँ शरण को?" बोले वो, "हाँ, बुला लो!...
हेतु! मैं उठा, पूजन किया, गुरु-नमन किया और उस स्थल का ताला बंद कर दिया, बंद ताले को जांचा, वो सही लगा था, मैं फिर वापिस हुआ, आया संचालक के पास और चाबी...
मेरे से पूछ पूछ के, लिए उसने! मैंने भी हाँ हाँ ही कही! और फिर हम चले वहाँ से,पकड़ा रिक्शा और आ गए वापिस! वो अपने कक्ष में ले गयी मुझे, और सीमा से पानी...
कर ली कंघी, बाँध लिए केश, पहन लिया स्वेटर! कर दिया एहसान मुझ पर! और आ बैठी बिस्तर पर ही! "काम क्या है वहां?" पूछा मैंने, "मिलना है किसी से!" बो...
हंस पड़ी खिलखिलाकर! चलो, माहौल हल्का हुआ! मेरा हुक्का गुड़गुड़ाना भी बंद हो गया था! "सीमा कहाँ है?" पूछा मैंने, "गयी है कहीं, आ जायेगी" बोली वो! ...
पीले रंग का, गले पर, सुनहरे रंग के तार थे! चुस्त पाजामी थी! आज तो आग सी भड़का दी थी उसने! मुझमे तो पल भर में ही हवा भर गयी थी! "क्या हुआ?" पूछा उसने...
आ गए वापिस फिर! शरण ले आया था सामान सारा, और हम हए शुरू! "आज कुछ नहीं बनाया?" शर्मा जी ने पूछा, "ला रहा हूँ अभी!" बोला शरण! "क्या बनाया है?" ब...
और यही चाहता था मैं! हंसी, तो मेरा दिल खुश हुआ! हंसती हुई ही अच्छी लगती है उत्तमा! "अब पूर्णिमा आने में समय शेष नहीं!" कहा मैंने, "हाँ, परसों ही है"...
वो! मैंने तौलिया दिया उसे! और उसने चेहरा पोंछा अपना! काजल तो कब का बह चुका था! शायद कोई दो घंटे पहले ही! "बैठो" कहा मैंने, बैठ गयी वो! मेरे कंधे स...
फिर से रुलाई फूटी! और फिर से मुझे कस के जकड़ लिया! मैं उसके सर पर हाथ फेरता रहा! उसको समझाता रहा, मनाता रहा, आंसू बंद हों, इंतज़ार करता रहा! लगा...
उसको उठाया, आंसू पोंछे उसके! खड़ा हुआ, उसको खड़ा किया और भर लिया भुजाओं में अपनी! उसके आंसू मेरी गरदन से टकराये, तो मेरे दिल ने ही मेरी भर्तस्ना की, म...
