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"आप देख लेना!" कहा मैंने,"नहीं समझा?" बोले वो,"यहां विद्या नहीं, महाविद्या चाहिए!" कहा मैंने,"अब समझा!" बोले वो! "वो देखिये?" कहा उन्होंने,"क्या है?...
चिपका दी गयी हो! और वो कजरी, कजरी का रूप ऐसा था कि एक बार जो देखे, पलकें मारना ही भूल जाए! वे फिर से घूमे, और ऊपर उठे! और फिर से लोप!और तब बाबा भोला भ...
मित्रगण! जब कोई स्त्री आपके संग संसर्ग में हो, तो ऐसे कई टोटके हैं, क्रियाएँ हैं, जिन्हे आप मध्य में करें संसर्ग में, तो वो अमुक स्त्री आपको जीवन भर न...
हमारी तो! आँखें फेरनी पड़ीं मुझे और शर्मा जी को! और प्रकाश की कौंध में हमें दीखे ही नहीं वो! और जब प्रकाश मद्धम हुआ, तो नज़र आये! दूध की तरह से सफेद थी ...
मैं मुस्कुराया!"सुनो, कुछ भी हो! नहीं आना! मैं देख लूँगा सब!" कहा मैंने,"हाँ, नहीं आऊंगा!" बोले वो,फिर से प्रकाश कौंधा!और वे प्रकट हुए!इस बार नयी मुद्...
"हाँ, कोई हरकत भी नहीं?" बोले वो,"मेरी समझ से बाहर है ये!" कहा मैंने,उन सेविकाओं ने, कजरी के बदन को लीपा! लीपा, पता नहीं किस से, हमें नहीं दिखायी पड़ा!...
बिल्ली के भाग से छीका फूट गया था! नहीं तो जीवन भर कभी अवसर नहीं आता उनके पास ऐसा कुछ देखने का!"फिर से लोप?" बोले शर्मा जी,"हाँ!" कहा मैंने,"ये क्या स्...
"हाँ, अब समझ गए आप!" कहा मैंने,"तब क्या महाशुण्ड का उस उत्तमा से संसर्ग उचित होगा? मेरा मतलब क्या कजरी ऐसा होने देगी?" पूछा उन्होंने,"कजरी चेतनाहीन है...
और मैंने जीभ के नीचे वाले स्थान पर वो मिट्टी रख दी!"मुंह बंद करो, और जो मैं बोला रहा हूँ, उसको मन ही मन नौ बार पढ़ो!" कहा मैंने,और मैंने एक लघु-मंत्र ब...
कभी ऐसा कुछ देखा ही नहीं था! कजरी जैसे नीमबेहोशी में थी, क्योंकि वो कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी! इसीलिए मुझे ये लगा कि वो नीमबेहोशी में है! जैसा वो...
विश्वासघात?उस उत्तमा के साथ?कैसे ज़लील लोग हैं ये? कैसे ज़लील? किसी के जीवन से खेल रहे हैं? मात्र अपनी क्षुधापूर्ति हेतु? घृणित लोग! थू ऐसे बाबाओं पर! ...
अब तो भड़का मेरा गुस्सा!मैं आगे बढ़ा और हाथ पकड़ लिया मैंने बाबा ऋषभ का!वे हंसने लगे! जैसे मेरा उपहास उड़ा रहे हों!"निकल जाओ यहां से!" मैंने गुस्से से कहा...
"अद्भुत!" मेरे मुंह से निकला!"हाँ, अद्भुत!" बोले बाबा भोला!मेरे संग ही आ खड़े हुए थे वे!"बस, प्रणय आरम्भ हो!" बोले वो!मैं मुड़ा! उनको देखा!क्या कहा?" प्...
में! मेरी नाक और मुख में, नीचे हलक़ में, गहरे से बैठ गयी थी वो सुगंध! और तभी, तभी कजरी से आलिंगनबद्ध हुआ वो विद्याधर! कजरी की देह पर उसकी बलिष्ठ भुजाओं...
वो कहाँ है?हम सब हैरान! स्तब्ध!मित्रगण!कजरी हवा में थी, और लेट गयी! हवा में ही! जैसे शयन-स्थल हो उसके नीचे!केश नहीं लटके, टांगें नहीं लटकीं!जाइए, किसी...
