Last seen: May 1, 2026
वो आगे बढ़ा, उस ढेरी के बाएं से, मेरे पास आने के लिए!आया मेरे पास, रुका कोई छह फ़ीट पर!"कौन हो तुम?" बोला वो,आवाज़ ऐसी कि जैसे किसी मेघ ने कुछ कहा हो!"तु...
मैंने ऊपर देखा, तो ऊपर, मुझे कुछ पक्षी से दिखे, उड़ते हुए!ध्यान से देखा, तो पता चला कि वो गरुड़ हैं! बड़े बड़े गरुड़!उद्देश्य स्पष्ट था, मुझे नोंचने फाड़ने ...
कजरी और उत्तमा, मुझे ही देखे जाएँ!सोच में पड़ें! उत्तमा सोचे, कि मैं हूँ कौन? और कजरी सोचे, कि मैं कैसे बाधा बन गया हूँ उनके लिए! कैसे हटे ये बाधा?"कजर...
इक्का-दुक्का लोग ही आवागमन करते हों, अब ये मिट्टी किसी काले कपड़े में बाँध लीजिये! अपने सर से लेकर पाँव तक इक्कीस बार ये कपड़ा घुमाइए, वारिये, उतारिये, ...
"जो भी हो, मुझे भय नहीं!" कहा मैंने,"इतना दुःसाहस?" बोला वो,"यदि ये दुःसाहस है तो ये ही सही!" कहा मैंने,"लौट जाओ!" बोला वो,"उत्तमा के बग़ैर तो हरगिज़ नह...
और तभी मेरे सामने की भूमि में से अग्नि प्रकट हुई! भूमि जैसे दलदल सी बन गयी! मेरे पाँव डूब चले, और लगा, मैं नीचे को धसक रहा हूँ! ये प्रयोग था उस महाशुण...
साथ! मैं उका कुछ अहित तो नहीं कर सकता था, हाँ, वो कजरी एक मोहरा थी मेरे पास! उसको प्रताड़ित करता तो शायद कुछ बात बनती! यही एक काट थी मेरे पास उस महाशुण...
महाशुण्ड, मुझे देखे, फिर उस उत्तमा को देखे!नहीं आई उत्तमा! मुझे यही आशा थी! नहीं आएगी!"उत्तमा?" मैं फिर चिल्लाया!और वो महाशुण्ड, दहाड़ा बहुत तेज! भारी-...
और उस उत्तमा का रूप परिवर्तित हुआ!दिव्यता ने ढक लिया उसके सम्पूर्ण शरीर को!रूप-रंग सब बदल गया एक ही क्षण में!महाशुण्ड ने, उत्तमा का हाथ खींचा और ले लि...
उत्तर नहीं था! मेरा दिमाग उलझा हुआ था! कुछ शंकाएं थीं! वे अब पौधे न रह कर, लहलहाते वृक्ष बन गयीं थीं!कौन किसे जानता है?क्या बाबा लोग जानते हैं कजरी को...
वैसा ही, कजरी जैसा श्रृंगार! और वो दमकता हुआ विद्याधर मुस्कुराये!और अगले ही पल, जैसे तन्द्रा टूटी उत्तमा की!उसने कजरी को देखा और उस महाशुण्ड को, सर पर...
ओह.......अब समझा" बोले वो!और उधर, वे दोनों आपस में कानाफूसी कर रहे थे! बना रहे थे योजना! लड़ा रहे थे प्रपंच! बना रहे थे योजना! और प्रतीक्षा में थे, सही...
हाँ, वो वार्तालाप ही था, सब मूर्तियां सी लग रही थीं! जैसे हवा में मूर्तियां खड़ी हों! कजरी भी उनके समान ही लगने लगी थी! वो भी पाषाण सी बनी, वार्तालाप क...
और इस बार!इस बार कजरी तो मुझे कोई विद्याधरी ही लग रही थी!आभूषण ही आभूषण! पूरी देह पर आभूषण! देह ऐसी चमके उनसे, कि जैसे चौरासी श्रृंगार धारण किये हों उ...
नहीं सुनाई पड़ रहा था कुछ भी! एक अक्षर भी नहीं! तभी उसने कजरी को उसके नितम्बों से पकड़ कर खींचा अपनी तरफ और कजरी उसके वक्ष में समा गयी! अपनी दोनों भुजाओ...
