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"मैं भी!" बोली वो! "कब आर्टी?" पूछा मैंने, "दो दिन हुए" बोली वो, "वहीं से? वो कौन सी जगह है?" कहा मैंने, याद करते हुए, "काठगोदाम!" बोली वो, "हाँ हाँ!"...
था सहायक, वो चला भार और मैंने जूते खोले अपने, जुराब उतारे और बैग में से चप्पलें निकाल ली! अब जाकर आराम मिला पांवों को! शर्मा जी भी, जूते-जुराब उतार, आ...
से भागे भागे शर्मा जी आ रहे थे! मैंने देख लिया था उन्हें!"आओ उत्तमा!" कहा मैंने,और मैं उसको ले चला वापिस!शर्मा जी आ गए, मुझे गले से लगा लिया उन्होंने!...
गए! रहा गया महाशुण्ड! और मैं उसके संग चल पड़ा बहता बहता उस ढेरी तक! और उतर गए हम वहाँ! कजरी के चेहरे से झलकता था कि जैसे उसको ये सब पसंद नहीं आया था! औ...
"मानव-धर्म निभाने के लिए! चूंकि, इस से बड़ा धर्म इस धरा पर है ही नहीं कोई!" कहा मैंने,वो मुस्कुराया!आगे आया!बरसात होने लगी पुष्पों की!वो नीचे उतरा अब, ...
"कितने मानवों से साक्षात्कार हुआ तुम्हारा?" पूछा मैंने,"तुमसे पहले चार!" बोला वो,"प्रश्न क्या हैं?" पूछा मैंने,मित्रगण! ये जितनी भी योनियाँ हैं, ये सा...
मैंने नहीं रुका! रुकता भी कैसे! "ठहरो मानव!" कहा उस महाशुण्ड ने!मैं रुका, फिर आगे बढ़ गया! जैसे ही मैं उस दीवार तक पहुंचा, जहाँ से बाहर जाने का टास्ता ...
जिसे मैंने सृजित नहीं किया, उसे मिटाने का भी मेरा कोई अधिकार नहीं! मानव कर्म-फल के तांते से बंधा है, और कजिरी को भी उसकी तांते से जूझना है, एक न एक दि...
अब मैं कौन?"उत्तमा? क्या यही तुम्हारा निर्णय है?" पूछा मैंने,"हाँ" बोली वो!अब हंसा मैं! ज़ोर से हंसी आई अपनी मूर्खता पर!"क्या तुमने छल नहीं किया मुझसे?...
बातें करूँ! फिर ले जाऊॅं उसको वापिस! इस स्थान से निकाल कर!और उसने अपनी आँखें उठायीं ऊपर!मुझे देखा, पलकें झपकाईं, मैं साँसें थामे, देखता रहा उसको!"उत्त...
फिर मुस्कुराया!"तब मान जाओगे?" बोला वो,"हाँ! फिर मेरा कोई औचित्य नहीं!" कहा मैंने,"स्वीकार है!" बोला वो,और देखा उसने ऊपर!उत्तमा की निढाल देह, नीचे आई,...
मात्र वायु में ही हाथ चलाता रहा!"सुनो मानव!" बोला वो,मैं गुस्से में था, हाथ चलाता ही रहा! चलाता ही रहा!"सुनो मानव?" बोला वो!मैं थक गया था, बुरी तरह से...
और ठीक मेरे सामने एक स्त्री नज़र आई मुझे,एक नग्न और काली सी स्त्री, हाथों में अस्थियां पकड़े,अत्यंत ही कुरूप थी वो,टांगें और हाथ ऐसे, जैसे फीलपांव हो रख...
रुका मैं, वो महाशुण्ड और कजरी, आँखें फाड़ देखे मुझे!"मान जाओ महाशुण्ड! मान जाओ! जाने दो इस उत्तमा को!" कहा मैंने,चुप खड़ा रहे!कजरी चुपचाप देखे!"बोलो महा...
