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बाबा हरूं, वहीं खड़े थे किशन के साथ ही, "कुछ मिला?" पूछा मैंने, "कुछ नहीं बोले वो, "चलो, इसी रास्ते पर आगे बढ़ो!" कहा मैंने, और हम बढ़े, धीरे धीरे ...
और जब वो दो फ़ीट की दीवार खो दी, तो एक छेद हुआ, मारी रौशनी अंदर! "वो क्या है?" बोला मैं, "दिखाओ?" बोले शर्मा जी! "अरे हाँ!" बोले वो, "कुछ मूर्ति सी है...
रौशनी मारी अंदर, तो अंदर, मिले हमें साँपों के कंकाल! एक दूसरे से बंधे हुए! "ये किसलिए?" बोले शर्मा जी, "अभी देखता हूँ" कहा मैंने, और वो कंकाल, निकल...
और जैसे ही देख रहा था की तभी मेरे घुटने के पास कुछ चुभा, मैंने रौशनी मारी, वो एक खूटा सा था, मैंने मिट्टी हटाई वहाँ से, ध्यान से, तो मुझे वहाँ, एक चटा...
घंटे के बाद, हम उस गुफा के तरफ बढ़े! आये गुफा के मुहाने तक, टोर्च जलायी, और मैं चला अंदर, ये गुफा साफ़ थी, कम से कम उस पहली वाली से, मैं चला आगे और झट...
पानी में फिर से आवाज़ सी हुई! जैसे, कोई मछली फड़कती है पानी में! "बाहर चलो जल्दी!" कहा मैंने, और हम भागे वहाँ से! अब पता नहीं क्या था उस पानी में! ...
था, अर्जुन जैसा लगता था, लेकिन उसके पत्ते बड़े अजीब से थे, जैसे कढे के होते हैं! "आओ, ज़रा आराम करें!" कहा मैंने, और हम वहीं घास पर बैठ गए! पानी पि...
और तभी हाथ रखा उसने मेरी छाती पर, सुश्री ने, मैंने देखा, आँखें बंद थीं उसकी, सो गयी थी, मैंने उसके हाथ पर हाथ रखा और आँखें मूंद ली! रात भर, किसी गुड़ि...
"अरुणा? यही है न?" पूछा बाबा हरु ने! "हाँ, यही लगता है!" बोली वो, "आओ, देखें!" कहा मैंने, और हम सब आगे गए! इस समय तक, धुंधलका छाने लगा था! थोड़ी देर म...
क्रूरता से इस संसार से सदा के लिए विलुप्त हो गया! उसको मनुष्यों से भय नहीं लगा था, पहली बार ही देखा था, वो करीब आ जाया करता था मनुष्यों के, और उन मनुष...
उपवन कितना बड़ा है, क्या पता?" कहा मैंने, "पता तो करना होगा!" कहा उन्होंने, "तो चलो!" बोला मैं, "आओ सब!" बोले वो, और हम सब चले फिर, सिर्फ अंदाज़े स...
अब उसने देखा आसपास, कई जगह! कहीं कुछ नहीं! "कुछ नहीं है!" कहा मैंने, "हाँ, कुछ नहीं!" कहा उसने! "सारी मेहनत बेकार!" कहा मैंने, "नहीं होगी!" बोली वो...
सामने हैं!" कहा मैंने, "हाँ, उसी को देख चल रहा हूँ!" बोले वो, मैं हंस पड़ा! "आने ही वाला है!" बोले शर्मा जी, "हाँ, वो तो रहा!" कहा मैंने, "बस, पहुँच ज...
और तब मैंने एक रास्ता बनाया दिमाग में, यहां से ये छोटा रास्ता पड़ता! "आओ, यहां से" कहा मैंने, और चला मैं, दौड़ के सुश्री आई मेरे पास! "चलो, आगे चलो, ब...
पूछा शर्मा जी ने, "कोई पौना घंटा!" बोला मैं, "सर घूम रहा है तभी!" बोले वो, "कच्ची नींद रह गयी!" बोला मैं, "हाँ, इसीलिए शायद!" बोले वो! हम चल पड़े थ...
