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बात करें उस सोरन से, "लेटना ही सुश्री?" पूछा मैंने, "नहीं" बोली वो, "थकावट मिट जायेगी" का मैंने, "आप मिटाओ!" बोली वो, "जैसी तुम्हारी मर्जी!" कहा मैंने...
अभी घंटे भर में निकल आता! कोई पौना घंटा हमने अब यहां आराम किया, यात्रा तो अब आरम्भ होनी थी! "चलें?" बोला मैं, "हाँ जी चलो!" बोला सोरन! और सब उठे अब...
मेरी जिज्ञासा शांत हो जायेगी!" बोला मैं, "बस?" पूछा उसने, "हाँ बस!" कहा मैंने, "आपको क्या मिला?" पूछा उसने, "सुश्री!" कहा मैंने, हंस पड़ी! मेरे ये शब्...
क्या मुसीबत है?? अब जाना ही पड़ा, फिर से आरती उतारो मोहतरमा की। मनाओ, ताकि अगले घंटे शांत रहै! गया मैं, दरवाज़ा खुला था, अंदर ही चला गया, बैठी हुई ...
गोले ऐसे छिल रहे हैं जैसे सड़क साफ़ करने वाले लोहे के ब्रश से घिस दिए हों!" बोले और खुद भी हँसे! अब मुझे रुकना पड़ा। हँसते हँसते पेट दुखा! "बस यार ...
बोले वो, "हाँ, आज चढ़ाई भी तो बहुत की है!" कहा मैंने, "पिंडलियाँ ऐसे दर्द कर रही हैं, जैसे मैं ही दौड़ का विजेता हूँ!" बोले वो! "पानी पियो!" कहा मैंने...
कहा मैंने, "यहाँ से कितना?" पूछा उन्होंने, "ये नहीं पता!" कहा मैंने, "चलें क्या?" बोले वो, "चलो अभी!" कहा मैंने, और हम सभी, उतरते चले गए, नीचे के ल...
"चलें?" बोले बाबा तेवत! "चलो!" कहा मैंने, कपड़े झाड़ते हुए, कोई आधा घंटा आराम कर लिया था हमने! आखिर में हम वहां पहुँच ही गए! लेकिन ये क्या? मंदिर खाली...
दिमाग पर ज़ोर डाला अपने! और दो जगह बता दी, दोनों ही आसपास थीं! ये शुक्र था! अब उस से रास्ता पूछा तो वो भी बता दिया! यहाँ से कोई पांच किलोमीटर पूर्व मे...
हुआ?" पूछा मैंने, "आप पता करो" बोले वो, "करता हूँ" कहा मैंने, मैं उतरा, गया एक जगह, और पढ़ा रुक्का ! हुआ हाज़िर सुजान, अब पूछा उस से, और कुछ हाथ लग...
से, "अरे जंगल है, कोई पिकनिक नहीं!" कहा मैंने, "तो क्या हुआ?" बोली वो, "चलोगी, लेकिन हमें ढूंढने तो दो?" कहा मैंने, "हम चलते तो क्या रास्ता लम्बा हो ज...
महीने पुराना अखबार है!" बोले वो, "क्या मिल इसमें?" पूछा मैंने, रख दिया एक तरफ! "कुछ नहीं!" बोले वो, मैंने अब कपड़े बदले, और आ लेटा बिस्तर में! "ये ...
चलते गए! जंगल जैसा माहौल बन गया था! "बाबा हरु?" कहा मैंने, "हाँ?" बोले वो, पीछे देखते हुए, "आप पता कर लो खोजी से?" कहा मैंने, "अच्छा!" बोले वो, अब ...
उसने मेरा! आँखें बंद थीं उसकी! "नींद नहीं आ रही?" पूछा मैंने, "नहीं!" बोली वो, "ऐसे तो आएगी भी नहीं!" कहा मैंने, "फिर कैसे आएगीर" बोली वो, "आराम से ले...
का ही था! रास्ता साफ़ मिला, गाड़ी दौड़ती चली गयी! कोई ढाई घंटे चलने के बाद, गाड़ी रुकी, ढाबे से थे वहाँ, हम चाय-पानी के लिए रुके थे वहां, हाथ पकड़, उत...
