श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

था! तड़कता-भड़कता! और हम यहां अकड़े जा रहे थे! अब कहाँ देखी ऐसी महफिलें जहां शबाब परोसा जाता हो इस क़दर! आप बटोरने वाले बनो! शबाब लुटाने वालो की कमी न...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

वे अपनी टांगें, अपनी जांघे और कमर, ऐसे मटकाएँ, कि नज़रें उलझ जाएँ उनके बदन से! एक तो जिस्म ऐसा, कमर ऐसी पतली कि मूरत सी लगें, और जब रिद'फां में जुम...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

नज़र उठती तो रुख्सार-ए-आबिदा से जा लिपटती, और फिर, वापिस ही न होती! जुहराह-ज़बीं ने, क्या क़ातिलाना जिस्म चुना था! गोशा-गोशा, दिल की चीर देने वाला, जि...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

बिछे थे, लोग वहीं बैठे थे, उसको घेरकर, लोग भी ऐसे कद्दावर, जैसे किसी अखाड़े में ऐय्याशगाह खुल गयी हो! सभी पहलवान सरीखे! और वहीं, पास में, एक बड़ी स...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

तो उस सराय को भी देख्ना था! दो कोस बतायी थी, कोई अधिक दूर नहीं! खैर, हम यहां मेहमान थे, और ख़िदमत ऐसी हुई थी, कि, बार बार दिल यही मांगने वाला था, अब द...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

"कहें आतिरा?" बोला मैं, "संग ले जा सकते हैं?" बोली वो, "संग?" बोली वो, "हाँ! संग!" बोली को, "वजह?" बोला मैं, "वजह नहीं वजूहात!" बोली वो, "ओह, बताएं?" ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

और चले उसके पीछे पीछे, अब मैं उसकी चाल का ही दीवाना हो चला था! कैसी अदा भरी चाल थी उसकी! मेरी तो नज़रें उसी पर रही! हम सीढ़ियां उतरे और फिर एक गलियारे...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

बहुत ज़रूरी था! "कोई 'अपना' तो होना चाहिए न वहाँ! "हम अकेले हैं बहुत!" बोली वो, "अब नहीं!" बोला मैं, "नज़रों में पनाह दीजियेगा!" बोली वो, आवाज़ लड़...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

और टटोलूं, तो कुछ हाथ न आये! और सबसे बड़ी बात! हमाम का ये कायदा, मुझे तो समझ ही न आया! बंदा जान से जाए! लम्हा लम्हा! रिसे, कतरा कतरा! फिर वो उठी मे...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

ठीक था, वे चारों मेरे हाथों की. और पांवों की उँगलियों की मालिश सी कर रही थीं! बहुत अच्छा लगा रहा था, सच में! बहुत ही अच्छा! मेरी नज़र सामने गयी, वो जु...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

छुएं नहीं किसी से भी! मैं अभी बनियान उतार हो रहा था, कि मेरी कमर पर किसी ने हाथ फेरा, मैं पलटा, तो ये जुबैदा थी! मुस्कुराई, चेहरा एक अलग से अंदाज़ ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

सीढ़ियां थीं, कुल तीन, उतरे हम, और जो मैंने देखा, तो! तो आँखें खुली भट्टा सी! सन्न रह गया मैं तो! ये तो हमाम था! फूलों की कलियाँ और पंखुड़ियां पड़ी थी...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

आई अंदर, डिबिया खोली, और पान पेश किये! ले लिए हमने पान! वही लज़ीज़ पान! "आप ही मेहमान हैं न, गर मैं बेख़ता हूँ तो?" बोली वो, "जी खानुम!" मैंने कहा, "म...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

"और उसके साथ?" पूछा उन्होंने, "आबगीन सा लगता है" कहा मैंने, 'आबगीन?" बोले वो, "हाँ, दस्तरख्वान पर रखने के लिए, शायद हाथ-धोने के लिए!" कहा मैंने, "अच्छ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ ब्यावर की एक घटना

असला बर्बाद नहीं हुआ!" कहा मैंने, "होता कैसे!" बोले वो, "बहुत बढ़िया! आई कौन थी?" पूछा मैंने, "उज़मा, और आपके पास?" बोले वो, "शम्सिया!" कहा मैंने, ...

2 years ago
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