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मार लेंगे!" बोले वो, मेरी हंसी निकली! "वैसे प्रत्यक्ष-मंत्र से कितना समय लगेगा?" पूछा उन्होंने, "कोई आधा घंटा!" कहा मैंने, "ज़्यादा से ज़्यादा ...
और तब आई वो साधिका उधर, गुस्से में! "ये क्या बदतमीज़ी है?" बोली गुस्से से, "बदतमीज़ी? घर से खाली हैं क्या तुम्हारी तरह?" बोले वो, "ऐसा है तो जाओ यहां ...
और सोये भी ऐसा, कि चार घंटे और बीत गए! बाहर अँधेरा हो गया था, मैंने मोबाइल चालू किया, और देखा बाहर, गड्ढे के बाहर कौशुकि बैठी थी अकेले! बाबा नहीं थे! ...
और कौशुकि, वहीं बैठे थे, वेदिका में सामग्रियाँ डालते जा रहे थे! "राजसूय यज्ञ चल रहा है भाई! हट जाओ!आज तो खैर नहीं किसी की भी!" बोले वो! राजसूय यज्ञ! म...
रात काली?" कहा मैंने, "अब क्या कहूँ?" बोले वो, "इनके बस में नहीं है, ये तो लगा देंगे एक महीना!" कहा मैंने, "आज करूँगा बात!" बोले वो, और फिर कोई आठ ...
खर्राटे बजा रहे थे! अब क्या जगाता उन्हें, वापिस आ गया मैं, सीधा अपनी ही झोंपड़ी के पास, शर्मा जी बीड़ी पी रहे थे, बाहर खड़े हो, "क्या हुआ?" पूछा उन्हो...
बोली वो, "तीन-चार दिन हो लिए!" कहा मैंने, "महीना भी लग सकता है!" बोली वो, "महीना?" पूछा मैंने, "हाँ!" बोली वो, और धड़धड़ाते हए, चली गयी आगे! "क्या ...
और हम चले अब बाबा के पास, वहीं लेटे थे बाबा गोपाल भी, बुला लिया अंदर, जूते खोल अंदर चले गए, बैठे वहाँ, बाबा गोपाल उठ कर, बैठ गए! "अब और कितना?" पूछा म...
नहीं करते?" पछा मैंने, "बाबा जसवंत ने ही भेजा है इनको!" बोले वो, "अच्छा! इन बाबा का नाम क्या है?" पूछा मैंने, "गोपाल श्री, मथुरा के हैं" बोले वो, "...
और चले आगे, आगे पहुंचे तो ऐसे ही गड्ढे थे! प्राकृतिक! "ये तो सारे उस जैसे हैं!" बोले वो, "हाँ!" कहा मैंने, एक गड्ढा छोटा था उधर, मैं वहीं बैठ गए, शर्म...
मंत्रोच्चारण कर रही थी! हम वापिस लौट चले, कहीं कोई व्यवधान न पैदा कर दें हम, इसलिए, और आ गए अपनी जगह, वहीं जा बैठे, "आज तो दढ़ियल बाबा भी आये हैं!" बो...
स्वादिष्ट बने थे! चना भारी होता है, आराम करवाता है, तो चाय-नाश्ता करने के बाद, आराम किया हमने! कोई आधे घंटे के बाद बाबा का सहायक आया, उस से बात हुई, ह...
जुगाड़ करवा दिया था, साथ में खाने को बढ़िया मसालेदार माल भिजवाया था! तो हमने आराम से खाया पिया, भोजन किया और लम्बे पाँव पसारे! हई सुबह! निवृत हए, और च...
छिलका, बारीक पीस लें, उसकी लुगदी को, पाँव के तलवों पर, और हाथों पर लगाएं, हफ्ते भर में, ये सब समाप्त हो जाएगा, लू लगी हो, तो घीया घिस कर, लुगदी बना...
और हम चल पड़े उधर, पहुंचे गड्ढे तक, अंदर झाँका, गड्ढा जस का तस! बाबा और श्रीचंद बातें कर रहे थे आपस में, किसी और स्थान की बातें कर रहे थे, और कौशुक...
