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“कागज़ कहाँ हैं तुम्हारे?” मैंने पूछे, “मेरे पास” घबरा के बोली वो, “ले आओ” मैंने कहा, वो भागी पीछे की तरफ! शायद अपने कमरे में! और इतने में उन...
“वो साले हाथ उठाने आये हमारे ऊपर, बांधो बोरिया बिस्तरा और दफा हो जाओ यहाँ से, अभी इसी वक़्त!” बोले गुस्से से! “कहीं नहीं जायेंगे हम” वो बोला, मदिरा...
नाख़ून लगे मुझे मेरी भौं पर, फिर एक आद घूँसा दिया उसने मुझे मेरी छाती पर! शर्मा जी आये और दिया साले के गुद्दी पर एक घूँसा! जैसे ही पलटा, मैए पक...
“मैं समझा दूंगा” मैंने कहा, तभी दरवाज़े पर मारी किसी ने लात! मैं खड़ा हुआ, तो जौहर बाबा ने बिठा दिया, “आप बैठो, मैं देखता हूँ” वे बोले, उन्हों...
अब मैंने पूछा उस से कि क्या हुआ था, सब बता दिया एस्टेला ने! निबट गया मामला! लेकिन खटक गए ये साले, कुत्ते, हरामज़ादे मेरी आँखों में! मुझे घूरते ...
अब मैंने सब बता दिया! “क्यों आया वो औघड़ यहाँ?” जौहर बाबा ने मेरा पक्ष लिया! और पूछा उन्ही से! “बुलाने आया था वो लड़की को” बोला एक, “लड़की आ जाती...
आये दो औघड़ वहाँ! “तूने मारा उसको?” एक बोला, “हाँ” मैंने कहा, “क्यों?” वो बोला, “उस बहन के ** के ये औकात मेरा गिरेबान पकड़े?” मैंने कहा, “किसन...
उसने तभी मेरा गिरेबान पकड़ने की सोची! मैंने एक दिया कस के साले के थोबड़े पर! नीचे गिरा! और चिल्लाने लगा! अब मैंने आव देखा न ताव! दिए साले को त...
करीब डेढ़ घंटा हो गया! और फिर से दस्तक हुई! अब मैंने दरवाज़ा खोला, बाहर वही औघड़ था, दरवाज़ा खुलते ही वही औघड़ अंदर आ गया! सीधा आया और हाथ थाम लि...
“मैं और ये, शर्मा जी हम दिल्ली से हैं, भारत की राजधानी से” मैं बोला, “अच्छा! मैं वहीँ उतरी थी फ्लाइट से” वो बोली, “अच्छा!” मैंने कहा, फिर से एक ...
“हाँ” वो बोली, मुस्कुराते हुए! “कितने दिन और हो यहाँ?” मैंने पूछा, “यहाँ? काशी में या भारत में?” उसने पूछा, “भारत में” मैंने कहा, “हूँ अभी, ...
मैं और शर्मा जी बिस्तर पर बैठे थे, और वो कुर्सी पर! हम सबने अपना अपना गिलास उठाया, और गटक लिया! उसने भी, और फिर थोड़ा सलाद खाया! अब बात आगे बढ़ा...
अब देखिये मित्रगण! कहते हैं न कि किसी भी मुसीबत को हम स्व्यं ही आमंत्रित करते हैं, सो कर ली मैंने! “हमारे साथ?” मैंने हाथ से इशारा करते हुए कहा!...
और फिर अपने जानकारों से फ़ोन पर बात की! बहुत फोन आये थे, सो सुनना भी था और करना भी था! अब घिरी शाम! सूरज का प्रकाश हुआ ख़तम! और लगी हुड़क! शर...
अभी आधे रस्ते में ही थे कि मैंने उस विदेशी नव-यौवना को फूल तोड़ते हुए देखा, उसने मुझे देखा, वो हंसी, मैं भी मुस्कुराया! अब उसके नैन-नक्श दिखे, ...
