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“वाह!” वो बोली, मैंने एक बगिया लगा रखी है उधर! वही देखा उसने! बेलें हैं, काशीफल की, तोरई की, खीरे की, घीये की, आदि आदि सब्जियां! “आओ...
पानी पिया हमने! और फिर मैं उसको अपने कक्ष में ले गया! उसको बिठाया! और खुद भी बैठ गया! “ये है मेरा स्थान” मैंने कहा, “बहुत सुंदर है!” वो बोली...
और मैं ढकता रहा उसको! सुबह हुई! हम जागे! स्नान आदि से फारिग हुए! चाय पी, और फिर अपना सारा सामान उठाया! और विदा ली अपने जानकारों से, स्टे...
हम बहुत देर तक बैठे वहाँ! और हुए फिर वापिस! आये, मुझे अपने कमरे में ले गयी वो! मैं बैठा! वो भी बैठी! “अब कल चलते हैं दिल्ली” मैंने कहा, ...
रास्ता बनाते हुए मुझे ले गयी एक तरफ! “कहाँ?” मैंने पूछा, “वो सामने” वो बोली, तारों और चन्द्र का प्रकाश था वहाँ! और नदी बह रही थी! एक उप-शाखा...
वे खुश! “ख़तम?” उन्होंने पूछा, अब मैंने बता दिया उनको! वे झूम उठे! मुझे गले से लगाया! और की गाली-गलौज उन दोनों को! तभी दरवाज़े पर आ खड़ी हुई ...
अब मैंने, तातार क्यों इस्तेमाल किया? क्या कोई नियम तोड़ा? नहीं! कोई नियम नहीं तोड़ा! मैंने बचाव किया अपना! वे मुद्रा-भंग के दोषी बने! यदि ...
पसलियां टूट गयीं! रीढ़ की हड्डी टूट गयी बीच में से! और कटे पेड़ सा बायीं तरफ झूल गया वो! अब रहा सरूप! जैसे ही तातार पलटा उसकी तरफ! उसने क्षमा ...
घुंघरू से बज उठे! बड़े बड़े बेलन जैसे भूमि पर चलने लगे! और फिर! हाज़िर हो गया पीले नेत्र लिए मेरा क्रुद्ध सिपहसालार तातार! उनको लगी खबर! वे हुए...
जोधराज सिहर गया अंदर तक! सरूप को आँखें फाड़ कर देखे! अब दो ही रास्ते थे! या तो पीछे हटे! या मेरा वार सम्भाले! मैं क्या करता! मात्र कुछ क्षण...
सरूप का त्रिशूल गिर गया था हाथ से! वो अपने पीछे बने एक गड्ढे में पाँव रखने से हुआ! त्रिशूल गिरा उसके भोग पर! भोग बिखर गया! मदिरा बिखर गयी! अ...
भूमि पर चिन्ह काढ़े! “वलयरूपा” मेरे कान में स्वर पड़े! अब मैंने भोग थाल उठाया, कुछ चबाया, और फिर निकाल कर, तीन ढेरियां बनायी! काल-रूढा! ...
लोप! चली गयी! मेरे महा-मंत्र ने कर दिखाया ये! मैं अब बैठा, देख लड़ाई! वे हंस रहे थे! दोनों! दोनों ही! घटिया इंसान! भोग थाल उठाया सरूप...
मैंने किसी का आह्वान नहीं किया! तेज पवन चली! दुर्गन्ध के साथ! सड़े मांस की दुर्गन्ध! ताप बढ़ा वहाँ! रक्त की छींटे पड़े मेरे शरीर पर, गरम गरम ...
और चिमटा बजाया! मैंने भी यही किया! मैं तैयार था! उसने फिर अपने पाँव से भूमि पर थाप दी, कि मैं क्षमा मांग लूँ उस से! नहीं! कभी नहीं! मैंन...
