श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

वो आएगी! मुझे भी प्रतीक्षा है! सरूप का कुछ पता नहीं चला! न कुछ देख, न कुछ पकड़! कुछ नहीं! वो हार मान चुका था! जोधराज का क्या हुआ, ये नहीं...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

हम वापिस हुए, अपने स्थान पहुंचे, काटने को आया वहाँ का कोना कोना मुझे! वो बेरी का पेड़ पूछे उसके बारे में मुझसे! वो मेरा हरा तकिया, जो अब खाली...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना

पिछली रात के रुके आंसू, अब सैलाब बन कर फूट पड़े! बहुत समझाया, वापिस आ जाना, जब मन करे, आ जाना! तुम्हारा सदैव स्वागत है मेरे देश में! और फ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

मेरा दिल भी द्रवित था! उसके साथ मैंने बहुत समय बिता लिया था, वो अब परदेसी नहीं थी मेरे लिए, मेरी अपनी ही सी! बस, मेरा कोई अपना कहीं दूर बसता थ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

दो दिन का काम था, सो मैं, शर्मा जी और एस्टेला, हम तीनों निकल गए! एस्टेला को और भी घूमने को मिला, तो प्रसन्न हो गयी! इलाहबाद से वापिस हुए हम,...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

कुल मिलकर उसका भारत आने का उद्देश्य अब पूर्ण हो चुका था! मित्रगण! उसको साथ रहते रहते मेरे, करीब एक महीना गुजर चुका था! और फिर एक दिन बाबा जौहर...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

हालांकि उसने क्षमा मांग ली थी, लेकिन सरूप जैसे व्यक्ति भरोसे के क़ाबिल नहीं हुआ करते, वो ज़रूर किसी न किसी प्रबंध में लगा ही होगा, ऐसा मेरा मानना ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

खाना रख गया, फिर पानी ले आया, और पानी रख दिया, मैंने पानी लिया, और भर लिया जग में, और फिर से भर दिए गिलास! और पीते रहे हम! कुछ और प्रश्न...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

“आप कैसे आये इस क्षेत्र में?” उसने पूछा, अब मैंने बता दिया उसे! “मैं बहुत अव्वल छात्र था अपने छात्र-जीवन में, इन बातों पर यक़ीन नहीं करता था, परन्त...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

“एस्टेला, इस संसार में हम उस पर यक़ीन कर लेते हैं जो इस आँख से देखते हैं, जो हम अपने कान, नाक आदि से गृहण करते हैं, परन्तु यही संसार नहीं! संसार इन आँख...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

मैंने बात की उधर फिर, और यहाँ मैंने अपनी बोतल निकाल ली थी, मैं सहायक को खाने के लिए कुछ लाने को कहा, और वापिस हुआ कमरे में, एस्टेला जाग गयी थी...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

सहायिका आयी, और उसके कपड़े दे गयी, भूल गयी थी वो! “कुछ खाओगी?” मैंने पूछा, “नहीं, अभी नहीं” वो बोली, मैं लेट गया फिर, और वो बैठी रही! चाय...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

नहीं, हैं अभी, पेट भर गया मेरा!” वो बोली, “कोई बात नहीं, बाद में खा लेना” मैंने कहा, “हाँ” वो बोली, सरसों का तेल लगाया मैंने बालों में, और सूख...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१२ काशी की एक घटना – Part 1

तभी सहायक आया, और ढेर सारे बेर दे गया, “ये लो” मैंने कहा, उसने लिए, और खाने शुरू किये, “बहुत मीठे हैं!” वो बोली, “ये पेड़ मैंने ही लगाया था...

2 years ago
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