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इसका अर्थ स्पष्ट था! धौलिया का प्रपंच हम जान गए थे! उसने कभी ऐसा सोचा भी ना होगा कि ऐसा भी कभी हो जाएगा! अब वो सब तो ठीक था, परन्तु अब मुझे रूचि की चि...
“जी मै यहीं दिल्ली से ही हूँ” मैंने उत्तर दिया, “क्या आप भी तंतर-मंतर करते हैं?” उन्होंने पूछा, “जी थोडा बहुत” मैंने उत्तर दिया, “वैसे हमारे बाब...
“जी उन्होंने कहा कि वो रात के समय उस पर कुछ क्रिया करेंगे” वे बोलीं, “तो क्रिया की उन्होंने?” मैंने पूछा, “जी हाँ” वो बोलीं, “तो आप उस समय वहाँ ...
अभी उसने जवाब दिया ही था कि रूचि की माता जी आ गयीं वहाँ, उन्होंने बताया कि नीलू की मम्मी से बात हो गयी है और वो नीलू के साथ यहीं आ रही हैं मिलने के लि...
“मैंने जब पूछा तो उन्होंने बताया कि लगभग सात-आठ साल तो हो ही गए हैं” वे बोलीं, “अच्छा! क्या मेरी नीलू की माता या पिता से बात संभव है?” मैंने पूछा, ...
“आप भी बैठिये ना?” अब तमीज से पेश आई वो! “गुरु जी, ऐसा होता है इसके साथ, सारे इलाज करा लिए, लेकिन मेरी बेटी को ना जाने क्या हो गया है?” वो दुखी होके...
सुबह उठे, दैनिक-कर्मों से फारिग हुए, मैंने थोड़ी पूजा की और फिर जब नौ बजे तो शर्मा जी ने गाड़ी स्टार्ट कर ली, हम गाड़ी में सवार हुए, श्रीमती महाजन को अपन...
वे दोनों माँ-बेटा चले गए, अब शर्मा जी ने मुझे देखा और बोले,”ये क्या चक्कर है गुरु जी?” “चक्कर तो है शर्मा जी” मैंने हंस के कहा, “कैसा चक्कर?” उन्ह...
“एक बात बताइये, जब रूचि को वहाँ ले गए थे आप, तब वो कैसी थी?” मैंने पूछा, “तब ठीक थी” वो बोलीं, “ह्म्म्म!” मैंने कुछ सोचते हुए कहा, “एक बात और बत...
“अच्छा, आपने बात की?” मैंने पूछा, “हाँ जी” वो बोलीं, “क्या बताया उन्होंने?” मैंने पूछा, “यही कि लड़की चपेट में है, जल्दी ही इलाज करवाओ उसका” वो ब...
“कौलिक! मेरा आदर और नमस्कार स्वीकार कर!” मैंने कहा और उसके पाँव छू लिए! “जा औघड़ जा! जो चाहेगा तुझे मिलेगा!” उसने कहा, अब मैंने उसके हाथ पाँव खोल द...
“मै तुझे क्या समझाऊं भुंडा, तूने तो मुझसे भी अधिक दुनिया देखी है, मै क्या बता सकता हूँ तुझे?” मैंने कहा, “मुझे मेरे बदले का मलाल रहेगा औघड़! बस!” उसन...
“रौशनी भी दे दूंगा” उसने कहा, “नहीं ज़रुरत उसकी” मैंने कहा, अब वो शांत हुआ, हाथ मलने लगा! गुस्से में घूरने लगा मुझे! “भुंडा! अब तेरे पास कोई ...
“ओ चौन्सठी! मुझे पूरा कर देती तू!” वो फिर चिल्लाया! “वो नहीं चाहती थी कि तू ऐसा करे! इसीलिए अधूरा रह गया तू!” मैंने समझाया उसको! “धोखा दिया हरामज़ा...
