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और फिर……………… उस संपोले ने मुझे ऊपर की तरफ देखा, गर्दन पीछे करके! जैसे मुझे इशारा किया हो ऊपर उठाने का! मैं नीचे बैठा, और हाथ आगे किया, उसने अपना...
बड़े बड़े घड़े! वे कुल पांच थे! मैं आगे गया! घड़े देखे! वे घड़े सुनहरे चर्म से बंद थे, मुझे नहीं पता वो सुनहरा चर्म किसका का था, किसी पशु का तो कदा...
मेरा उद्देश्य किसी को क्षति पहुंचाना कदापि नहीं था! इसीलिए मैंने त्वष्टार-विद्या का संधान किया, इस से महाताम विद्या की काट हो जाती है! मैंने मिट्टी उठ...
मैं तैयार था! वो सांप फिर से आगे आया! फिर से फुंकार मारी उसने! मैं इरादे भांप गया उसके! मैंने अब महाताम-विद्या का संधान किया, ज़ोर ज़ोर से बोलते...
उसने मुझे घुङकाने का प्रयास किया, मैं फिर भी नहीं हिला! मैं वहीँ खड़ा रहा! डर तो लग रहा था, लेकिन डर को दबाना ज़रूरी था! वो सांप आगे बढ़ा! मैं वह...
लगता था वो! मुझे तो साक्षात नागराज वासुकि अथवा नाग राजकुमार तक्षक सादृश प्रतीत हुआ वो! बहुत विचित्र सांप था वो! बहुत विचित्र! मैं आजतक नहीं भूला उ...
मैं समझ गया! मैंने शर्मा जी को पीछे भेजा! वे पीछे गए! अब मैंने एक मुट्ठी मिट्टी ली! उसको अभिमंत्रित किया, और गड्ढे में फेंक मारी! भयानक आव...
हम जागे, हाथ-मुंह धोये! फिर कुछ खाया-पिया! अभी पानी था हमारे पास, कम से कम दो दिन और गुजारे जा सकते थे! इतना पानी तो हम लेकर चले ही थे! खाने के ...
“बहुत मित्रवत था वो!” वे बोले, “पता नहीं क्यों?” मैंने कहा, “कारण नहीं समझ आया!” वे बोले, “मुझे भी नहीं!” मैंने कहा, “किसलिए आया था वो?” उन्हो...
शर्मा जी बैठे रहे! “बड़ा भयानक है ये मामला!” वे बोले, “हाँ, है तो!” मैंने कहा, “बाबा कैवट ने कैसे सम्भाला होगा!” वे बोले, “सही बात है” मैंने कह...
मैं भागा वहाँ! गड्ढा फिर से भर गया! अपने आप! आसपास की मिट्टी सब घुस गयी उसमे, अब वो फिर से पठार सा बन गया! कुछ ऐसा ही हुआ था पहले भी, जब सबकुछ श...
लेकिन उसने भी मुझ पर विश्वास किया था! मैंने हथेली खुली रखी थी, उसने मेरे हाथ के अंगूठे को लपेटा और उस से लिपट गया! फिर उसने अपना छोटा सा फन खोला! मुझे...
रह गया वो संपोला! वो वहीँ बैठा था! छोटी सी कुंडली मारे! वो आगे बढ़ा, मैं वही रुका रहा! वो मेरे जूते के पास तक आ गया! शांत! एकदम शांत! ल...
मैं आगे बढ़ा! वे शांत हुए! मैंने थाली रखी नीचे! नीचे बैठा, और थाली को आगे खिसकाया! एक ने देखा, और अगले ही पल अपने सर से थाली को फेंक मारा! ...
दरार चौड़ी हुई! भयानक मंजर था वहाँ! कोई और होता तो या तो भाग जाता या पछाड़ खा कर गिर पड़ता! भूमि फटी! मैंने गौर से देखा! धुआं बंद हुआ! मिट्टी बाहर आने लग...
