श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मित्रता थी! प्रेम था! और सबसे विशेष, विश्वास था! उसने मुझ पर विश्वास किया था! ये एक विलक्षण बात थी! “मुझे बताओ?” मैंने फिर से पूछा, वो च...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

आँखें खोलीं, मैंने देखा, उसकी पूंछ मेरी नाक से टकरायी! वो मेरे सर पर बैठ गया चढ़ कर! परछाईं में बैठे बैठे मुझे वो मेरे सर पर दिखायी दिया! मैंने...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

अपना हाथ आगे बढ़या! और मेरे हाथ पर चढ़ गया! अब उसका फन सुनहरी हो गया था, आधी देह चंदीली! “कौन हो तुम?” मैंने फिर पूछा, उनसे जीभ लपलपाई! जैसे...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“कौन हो तुम?” मैंने कहा, एक छोटी सी फुंकार! “बताओ मुझे?” मैंने कहा, फन बंद किया! “मुझे बताओ कौन?” मैंने पूछा, फिर से एक छोटी सी फुंकार! तभ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

और फन खोला! मैं नीचे बैठा ही था, अब लेट गया! आँखों में आंसू आ गए! पता नहीं किस वजह से! शायद उसके स्नेह से! शायद उसके विश्वास से! एक सांप...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मैं नीचे बैठा! हाथ नीचे रखा! वो नीचे उतर गया मेरे हाथ से! सीधा गड्ढे तक गया! और जैसे उस बड़े सांप से कुछ कहा उसने! बड़ा सांप नीचे हुआ, एकदम ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मैं विस्मित हो गया! वो तन के खड़ा हो गया, करीब आठ फीट, उसने नीचे देखा, मुझे, फुंकार मारी, हलकी सी! वो संपोला! मेरे हाथ में बैठा! देखत...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

जस का तस! मैं आगे बढ़ा! और आगे! भय समाप्त हुआ! लगा वो संपोला मुझे कुछ नही होने देगा! कुछ भी नहीं! मैं आगे बढ़ गया! अब मेरे और उस संपोले की...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मैं जान तो गया था, कि ये संपोला कोई विशेष है! लेकिन है कौन? एक और जिज्ञासा बढ़ गयी! अभी मैं सोच ही रहा था कि……………….. अभी मैं सोच ही रहा था कि एकद...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

उसने मुझे देखा, फन फैलाया! “बताओ?” मैंने कहा, एक फुंकार! छोटी सी फुंकार! “अपने दर्शन तो दो?” मैंने हाथ जोड़कर कहा! फिर से फुंकार! वो साधा...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मैं आगे बढ़ा! और आगे! गड्ढे तक पहुंचा! गड्ढे की मिट्टी काली हो चुकी थी! मैं नीचे बैठा! मित्रगण! क्या हो रहा था और क्या नहीं? कुछ नहीं पता...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मेरी उस से! उसकी पीली डरावनी आँखें ऐसी कि जैसे तलवार की धार की चमक! फिर उस सांप में फन बंद किया! मुझे अपने लपेटे से ढीला किया, और अपना फन मेरी...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

बड़ों जैसी! “नहीं!” मैंने कहा, उसने फिर से फन बड़ा किया अपना! “नहीं! इस स्नेह से बड़ी कोई दौलत नहीं! मैं नहीं लूँगा इसको! ये मेरी नहीं! ये आपकी है!...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

कौन हो तुम?” मैंने पूछा, मैं जानता था, वो नहीं बोलेगा! लेकिन, फिर भी मैंने पूछा, नहीं रोक सका अपने आपको! “कौन हो तुम?” मैंने फिर से कहा, उ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

लाल मिट्टी? ये क्या हुआ? ये कैसी माया? उस संपोले ने उन सभी घड़ों पर अपना फन मारा और वहाँ अकूत दौलत का अम्बार लग गया! चमचमाता हुआ सोना! इतना सोन...

2 years ago
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