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मेरे आंसू निकल पड़े! मैंने हाथ आगे बढ़ाया, वो दौड़ के, रेंग कर आगे बढ़ा! और मेरे हाथ पर चढ़ गया! मैं उठा! उसको उठाया! मेरे आंसू झर झर बह निकले!...
मुस्कुरायी, मैं धन्य हुआ! ओह! कैसा एहसास था वो! क्या नाम दूँ? कैसे लिखूं? कैसे बयां करूँ? नहीं कर सकता! कदापि नहीं कर सकता! वो मुक्त...
मुस्कुराया! “कौन?” उसने पूछा, “वो जिसको बाबा कैवट ने क़ैद किया था झोले में अपने!” मैंने बताया, वो मुस्कुराया! और अपना बायां हाथ आगे किया, आगे...
अलौकिक सौंदर्य उसका! लम्बा कद! सघन केश-राशि! घुंघराले, कन्धों तक झूलते केश! चौड़ा वक्ष! दिव्य आभूषण! मुस्कुराते हुए! फिर वहाँ और भी नाग प...
वहाँ हलचल हुई! भूमि में स्पंदन हुआ! हमने अपना संतुलन बनाया! फिर शान्ति हो गयी! कुछ क्षण बीते! कुछ क्षण और! नज़रें गड़ी रहीं उस गड्ढे पर! स...
कहाँ गया? क्या हुआ? बेचैन! बेसब्र! बेचैनी ऐसी कि पागल बना दे! पागलपन की कगार पर ला पटके! ऐसी बेचैनी! आधा घंटा बीत गया! कुछ नहीं हुआ! ...
फिर मुझे देखा, एक फुंकार, छोटी सी, मेरी आँखें फिर से नम हुईं! उसने फिर से फुंकार मारी! मैंने अपनी ऊँगली से अपने छलकते हुए आन्सू पोंछे, फिर...
आप गलत थे! गलत! गलत! बहुत गलत! उचित सजा मिली आपको! आपने विश्वास का क़त्ल किया! आप गलत थे! मैं विचारों में खोया था! फिर एक फुंकार! जैस...
उसने फन खोलकर रखा! इतना विश्वास! मैं धन्य हो गया! ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ! मेरा मित्र! वो, छोटा सा संपोला! एक औघड़ पर विश्वास किया उसने...
अपने मनुष्य मित्र के लिए स्नेह की फुंकार! प्रेम की फुंकार! मैंने फिर अपनी तर्जिनी ऊँगली से उसके सर को छुआ! उसने फन झुकाया! प्रेम से! मेरा मन...
कौन बतायेगा? है कोई? मैंने चारों और देखा, सभी सांप जैसे धकेले गए! सारे, उस गड्ढे के अंदर! जैसे हड़का दिया गया हो! जैसे उनको आदेश दिया गया...
सभी हटे! वो एक मिटटी के ढेले पर चढ़ा, मुझे देखा, फिर सर घुमाकर सभी साँपों को देखा, फिर एक ज़ोरदार फुंकार! पहली बार सुनी मैंने उसके गले से ऐसी ...
कैसा भय? तभी उसने मेरा मणिबंध छोड़ा! हाथ के मध्य आया! नीचे देखा, फुंकार भरी! मुझे देखा! मैं समझ गया! उसको नीचे जाना है! वे सांप सभी मुझ...
मैंने भी देखा, और तभी शोर सा हुआ! अजीब सा शोर! और तभी! तभी हज़ारों काले, पीले, सुनहरी, मटमैले और श्याम-नील सर्प, जैसे कोई सर्प-सेना निकली उस गड...
कैसा स्नेह! कैसा विश्वास! बिना शब्द का विश्वास! मेरी आँखों में फिर से जल छलका! “बताओ मुझे?” मैंने फिर से पूछा, फिर से फुंकार! वो जवाब तो द...
