श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मेरे आंसू निकल पड़े! मैंने हाथ आगे बढ़ाया, वो दौड़ के, रेंग कर आगे बढ़ा! और मेरे हाथ पर चढ़ गया! मैं उठा! उसको उठाया! मेरे आंसू झर झर बह निकले!...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मुस्कुरायी, मैं धन्य हुआ! ओह! कैसा एहसास था वो! क्या नाम दूँ? कैसे लिखूं? कैसे बयां करूँ? नहीं कर सकता! कदापि नहीं कर सकता! वो मुक्त...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मुस्कुराया! “कौन?” उसने पूछा, “वो जिसको बाबा कैवट ने क़ैद किया था झोले में अपने!” मैंने बताया, वो मुस्कुराया! और अपना बायां हाथ आगे किया, आगे...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

अलौकिक सौंदर्य उसका! लम्बा कद! सघन केश-राशि! घुंघराले, कन्धों तक झूलते केश! चौड़ा वक्ष! दिव्य आभूषण! मुस्कुराते हुए! फिर वहाँ और भी नाग प...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

वहाँ हलचल हुई! भूमि में स्पंदन हुआ! हमने अपना संतुलन बनाया! फिर शान्ति हो गयी! कुछ क्षण बीते! कुछ क्षण और! नज़रें गड़ी रहीं उस गड्ढे पर! स...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

कहाँ गया? क्या हुआ? बेचैन! बेसब्र! बेचैनी ऐसी कि पागल बना दे! पागलपन की कगार पर ला पटके! ऐसी बेचैनी! आधा घंटा बीत गया! कुछ नहीं हुआ! ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

फिर मुझे देखा, एक फुंकार, छोटी सी, मेरी आँखें फिर से नम हुईं! उसने फिर से फुंकार मारी! मैंने अपनी ऊँगली से अपने छलकते हुए आन्सू पोंछे, फिर...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

आप गलत थे! गलत! गलत! बहुत गलत! उचित सजा मिली आपको! आपने विश्वास का क़त्ल किया! आप गलत थे! मैं विचारों में खोया था! फिर एक फुंकार! जैस...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

उसने फन खोलकर रखा! इतना विश्वास! मैं धन्य हो गया! ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ! मेरा मित्र! वो, छोटा सा संपोला! एक औघड़ पर विश्वास किया उसने...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

अपने मनुष्य मित्र के लिए स्नेह की फुंकार! प्रेम की फुंकार! मैंने फिर अपनी तर्जिनी ऊँगली से उसके सर को छुआ! उसने फन झुकाया! प्रेम से! मेरा मन...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

कौन बतायेगा? है कोई? मैंने चारों और देखा, सभी सांप जैसे धकेले गए! सारे, उस गड्ढे के अंदर! जैसे हड़का दिया गया हो! जैसे उनको आदेश दिया गया...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

सभी हटे! वो एक मिटटी के ढेले पर चढ़ा, मुझे देखा, फिर सर घुमाकर सभी साँपों को देखा, फिर एक ज़ोरदार फुंकार! पहली बार सुनी मैंने उसके गले से ऐसी ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

कैसा भय? तभी उसने मेरा मणिबंध छोड़ा! हाथ के मध्य आया! नीचे देखा, फुंकार भरी! मुझे देखा! मैं समझ गया! उसको नीचे जाना है! वे सांप सभी मुझ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

मैंने भी देखा, और तभी शोर सा हुआ! अजीब सा शोर! और तभी! तभी हज़ारों काले, पीले, सुनहरी, मटमैले और श्याम-नील सर्प, जैसे कोई सर्प-सेना निकली उस गड...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

कैसा स्नेह! कैसा विश्वास! बिना शब्द का विश्वास! मेरी आँखों में फिर से जल छलका! “बताओ मुझे?” मैंने फिर से पूछा, फिर से फुंकार! वो जवाब तो द...

2 years ago
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