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शर्मा जी को साथ लिया, और फिर मैंने जांचने के लिए, एक मंत्र चलाया, और आँखें बंद कर लीं! आश्चर्य! यहाँ तो किसी मांत्रिक ने ताना-बना बुना ...
केबल टीवी के छत्र लगे थे, हर जगह! और कुछ ट्रेक्टर आदि के विज्ञापन! कुछ बीज आदि के! हम घर में घुसे, घर में तो मुर्दानगी छायी थी! हर त...
नाश्ता किया, और फिर हम चले वहाँ से, निकल पड़े, रास्ते में एक जगह रोकी गाड़ी, रुके, आराम किया, कुछ खाया-पिया, और फिर चल पड़े, जीते...
ज़रूरी, कुछ कागज़ात बनवाने थे, मैंने भी नहीं रोका, खैर, वे गए, और मैं अपने कामों में लगा, एक सहायिका आयी, कुछ पैसों की ज़रूरत थी उको...
ऐसा ही होता है! बेचारे दुखी बहुत प्रसन्न हो जाते हैं, उम्मीद में! और उम्मीद नहीं तोड़नी चाहिए! खैर, उन्होंने पता लिखवा दिया, जिला गाज़...
लेकिन नहीं पड़ा था, क्यों? "पूजा में कितना ख़र्चा आया था?" मैंने पूछा, "जी कोई बीस हज़ार" वे बोले, "अच्छा, और बाबा ने कितने लिए?" मैंने पूछा,...
"हाँ जी" वे बोले, "तो कहीं और दिखाते?" मैंने कहा, "जी दिखाया" वे बोले, "क्या कहा उसने?" मैंने पूछा, "बोला कि घर में बुरी शक्तियों का बसेरा...
रघु साहब और उनके साले साहब जीतेन्द्र! जीतेन्द्र जिला गाज़ियाबाद के रहने वाले थे, वहीँ गाँव था उनका, सड़क किनारे ही, पहुँच में था, अपना ही...
खैर जी, हम पहुँच गए थे! वहाँ से ऑटो लिया और अपने अपने घर पहुँच गए! अब सुबह ही मिलना था! हुई सुबह! नाश्ता आदि किया, भोजन किया बाद में...
और फिर सूचना आयी, हमारी गाड़ी आ पहुंची थी! हमने सामान उठाया अपना, और चल पड़े, प्लेटफार्म की तरफ, गाड़ी आयी, तो सवार हुए! बू दिल्ली ह...
अक्सर याद करता हूँ उसको! कभी अवसर मिला तो एक बार अवश्य ही मिलने जाऊँगा उस संपोले से! अवश्य ही! प्राणांत से पहले एक न एक दिन! अवश्य ही! साधुव...
प्रश्नों के उत्तर मिल गए थे! और यही बहुत था! उनकी इस कृपा से मैं ऋणी हो गया उनका! मित्रगण! हम उसी दिन वहाँ से निकल पड़े! वापिस आये! अजमेर पहु...
मैंने उसे! मैंने उसको मन ही मन धन्यवाद किया! और! अगले ही पल वो भी लोप हो गया! मैं चौंका! वहाँ कुछ पड़ा था! मैंने उठाया उसके, ये नाग-सूत्र...
सब याद आ गया! समय जैसे स्थिर हो गया था! वायु जैसे शिथिल हो गयी थी! मैं और शर्मा जी जैसे वहीँ के होक रह गये थे! जैसे मूर्ति बन गए थे! उस संपो...
