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मैंने कहा," अब तू किसी औरत के लायक नहीं बचा! इतने वर्षों की साधना में तूने कुछ नहीं कमाया! एक कन्या के सामने घुटने टेक दिए तूने! लानत है!" "पता नहीं...
उत्तर- मैं स्वयं श्रेष्ठ हूँ! प्रश्न- श्वेत-क्षुधा का अरिहंत कौन? उत्तर- मेरा चित्तमय साधक! प्रश्न- कलयुग-कालेन श्रेष्ठ साधक कौन? उत्तर- मेरा ...
उसके अन्दर अब ये अमोघ-शक्ति प्रविष्ट करानी थी! उसको भूमि पर लिटाया गया! और उसके गुप्तांग पर आदित्य ने अपने रक्त से अभिमन्त्रण आरंभ किया! फिर हुआ अघोर-...
“अवश्य!” वे बोले तदोपरांत मैंने नाग-पद्धति द्वारा उनका मार्ग प्रशस्त किया और वो युगल और अन्य मुक्त नाग-कन्याएं प्रस्थान करते चले गए, एक एक करके! म...
बड़ी गहरी बात कही थी उन्होंने, वो काल के इस खंड को भूल जाना चाहते थे! एक दुःस्वप्न की तरह! “और तुम! तुम डटे रहना! बहुत आयेंगे ऐसे, मुझसे बाबा! अपना प...
वो फुफकारा और वहाँ अन्य सर्प भी प्रकट हुए! उसने फिर से फुफकार मारी! और अपने बाएं चल पड़ा, जहां वो पत्थर थे! मैं समझ गया! समझ गया! प्रेयसी! प्...
हर लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा आये! मैंने सोचने का नाटक किया! “नहीं बाबा!” मैंने कहा, अब बाबा की साँसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे! “और क्या चाह...
आवाज़ में लरज़ थी उसकी, एक अनुनय, मैं रुक गया! “बोलो बाबा?” मैंने कहा, “बदल कर ले” उसने कहा, समझौता! अदला-बदली कर समझौता! “कैसी बदल बाबा?” मैं...
मुंह से अपशब्द निकाले! ठेठ तांत्रिक भाषा में! “और जतन कर लो बाबा! आज खेल ख़तम तुम्हारा!” मैंने हँसते हुए कहा, बाबा को जैसे काठ मारा मेरा व्यंग्य ...
ऐसी योनि है जो मिथ्याभाषी है, द्विअर्थी है, इसके क्रिया-कलाप सबसे पृथक हैं, कोई विरला ही साध पाता है शक्तियों को, ऐसे सम्बन्धों को! इसी निकटता का अनुच...
“कहो बाबा?” मैंने कहा, “तुझे क्या मिलेगा?” उसने अब तर्क से पूछा, “संतोष” मैंने कहा, “मैंने अपना जीवन लगा दिया, इसी को उद्देश्य बनाया है, क्या कि...
हुईं, अब प्रेतात्मा रूप में ऐसा करना चाहता था, सिद्धियाँ प्राप्त कर, रूढ़ता के आसान पर विराजमान हो कर न केवल शक्तिमान अपितु दैविक रूप भी प्राप्त करना च...
वहाँ एक नाग-कन्या उत्पन्न हुई, और पल में ही महा-पिशाचिनी के रूप में परिवर्तित हो गयी! मैंने त्रिशूल को चाटा और सामने से आती हुई नाग-कन्या के उदर में घ...
बाबा लोप! मैंने फिर से प्रत्य्क्ष-शूल भिड़ाया! बाबा फिर हाज़िर! “चला जा यहाँ से, चला जा!” बाबा ने कहा, मैं चुप रहा! एक भेजा उठाया मैंने! उस ...
