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“तू बच गया! बचा गया! अब जा यहाँ से” बाबा ने चिल्ला के कहा, “मैं नहीं जाने वाला कहीं बाबा” मैंने भी कह दिया, “हठ अच्छा नहीं” वो बोला, “आप भी तो ह...
“अरे बालक! हा! हा! हा! हा!” अट्ठहास! “छोड़ दो बाबा!” मैंने हाथ जोड़कर कहा, “जा! तुझे छोड़ दिया! बाबा ने छोड़ दिया!” वो बोला, “मुझे नहीं बाबा! इनको छ...
“कौन है तू?” मुझे पूछा गया, मैंने अपना परिचय दे दिया! “हूँ! समझ गया!” वो बोला, “आप इनको क्यों नहीं मुक्त कर देते?” मैंने पूछा, “कदापि नहीं” वो...
“ये! ये है दुमुक्ष! हा! हा! हा! हा!” उसने अब दम्भ से किया, मैं तो जैसे कटे पेड़ सा गिरा! क्यों? दुमुक्ष, एक नाग-पुरुष कैसे क़ैद हुआ? किसने किया?...
“जा! छोड़ दिया तुझे! जा!” उसने हंसके कहा, “चला जाऊँगा बाबा, परन्तु कुछ प्रश्न है, उनका उत्तर दे दीजिये” मैंने कहा, वो चुप हुआ! थोड़ी देर! “पूछ?”...
अब रात हुई, हम आ पहुंचे खेत, कोठरी में सामान रखा और साथ में लाये हुए कुछ खाने के सामान को बाहर निकाला, और अब होना था आरम्भ मदिरापान! मैंने और शर्मा जी...
“नहीं जी” वे बोले, “पिता जी के समय में?” मैंने पूछा, “हाँ जी” वे बोले, “हम्म्म” मैंने अंदाजा लगाया, ये पैंसठया का चक्कर है! मुझे याद आया! अर...
“अब कैसे पार पड़ेगी?” उन्होंने संशय से पूछा, “बाबा को जगाना होगा फिर” मैंने कहा, “कोई अनहोनी न हो जाए?” वे घबरा के बोले, “होनी होती तो आज ही कर द...
एक दूसरे को तोलते हुए हम! और! मेरी शान्ति भंग हुई! भंग हुई शान्ति! मेरे होठों पर पड़ती और नाक से बहती रक्त-धारा से! टप! टप! ऐसे बहे रक्त! ...
उसका शरीर किसी वज्र की भांति था! गले में पत्थरों की सी माला पहने, कौन सा पत्थर, ये नहीं मालूम पड़ा! नीचे उसके लुंगी पहनी थी या धोती, ये भी पता नहीं चला...
“कौन है?” मैंने विनम्रता से पूछा, कोई नहीं आया, और वो वहाँ क्रोध के मारे बस फटने ही वाली थी! अब मैंने महातमस विद्या जागृत की और प्रत्यक्ष-शूल भिड़ा...
“चले जाओ!” एक मर्दाना आवाज़ गूंजी! शर्तिया ये इस नाग-कन्या की तो नहीं है? कौन है जो नेत्राम-पाश में भी नहीं है? ऐसा कौन? भय हुआ! सिहरन हुई एक...
वो पीछे हटी! कुंडली खोलते हुए! अब मैंने नेत्राम-देख चालू की! नेत्र खोले तो मैं घबराया! ये तो एक नाग-कन्या है! लेकिन यहाँ कैसे?? अब फिर से ...
ये तो दैविक सर्प है अथवा कोई यक्षाभूषण?? मैं चकराया! सच कहता हूँ, दिमाग शिथिल हो गया! और जब दिमाग शिथिल होता है तो पास, दूर और दूर पास दिखाय...
“भाग जा” तभी एक फुसफुसाहट सी आयी! मेरे और शर्मा जी के हुआ अब कान खड़े, हम थोडा पीछे हटे! “मेरे सामने आओ?” मैंने कहा, कोई नहीं आया, बस हवा का एक झ...
