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उपहास करते हुए! आँखें फटी रह गयीं उन दोनों की! सन्न! त्रिशूल छूट गया हाथ से, अलख शांत पड़ने लगी! ईंधन मांगने लगी! और वो साध्वी, उठ...
मैं गिर पड़ा नीचे, भोग-थाल समर्पित किये! और फिर मन्त्र पढ़, उसकी प्रशंसा कर, उसको लोप किया! तीसरा वार भी खोखला गया! चलाया बांस था, ...
सेविकाएं नीचे उतरीं, और अब उद्देश्य बता दिया उसने! "नाश हो!" वो बोला, और! पल में ही वे सभी लोप! और मेरे यहाँ वो सेविकाएं प्रकट हुईं! ...
और वहाँ, वहाँ गौरांग हांफ रहा था, जाप करते करते, अलख में ईंधन झोंके जा रहा था! मदिरापान करता, और फिर से ईंधन झोंकता! और तभी वहाँ श्व...
गड्ढों से दिखाया गया! ये स्थान-शोभन क्रिया थी! मैं अपने चक्र में बैठ हुआ, जाप कर रहा था, आह्वान किया जा रहा था! और तभी मेरे यहाँ, अं...
गौरांग भी आगे बढ़े जा रहा था! मैं उसको और भड़का रहा था, ताकि वो सब प्रयोग कर सके, जो है उसके पास! फिर, मैं करूँगा वार! तभी चिल्लाया गौर...
और श्मशान, अपने यौवन पर था! गौरांग और मैं, एक दूसरे के शत्रु, डटे हुए थे! एक के गुरु की लाज लगी थी, और एक के गुरु के सिखाये ज्ञान की...
ग्यारह टुकड़े, और कुछ और सामग्री, अंगूठा चीर, इस चक्र के मध्य में, रक्त टपकाया, और फिर जाप किया! क्लिष्ट और महाप्राण मन्त्रों के उच्च...
रोड़का! प्रबल महाशक्ति की प्रधान सहोदरी! उसके केश-सज्जा का कार्यभार संभालती है ये! अत्यंत क्रूर, क्षण में भस्म कर देने वाली है, स्थूल तत...
कोई उच्चतम गुरु ही उसके उत्तर जाना होता है, वही मदद करता है साधक की, अन्यथा, प्राण संकट में पड़ सकते हैं! ये वीरावती दैविक-रूप तो रखती है, ...
वाचाल के भारी शब्द पड़े, "वीरवती!" वीरावती! वाह! ये सच में बहुत प्रबल औघड़ था! उसके गुरु ने, बहुत श्रम किया था उसके साथ, ये वीरावती...
तब, खड्ग उठाया गौरांग ने, और वो दूसरा औघड़, एक मेढ़े को ले आया, मन्त्र पढ़, उसकी गर्दन उसने भेरी पर फँसायी, और फिर अपनी अधिष्ठात्री का नाम...
कंक-मालिनी ने प्राण बचा लिए मेरे! मैं प्रणाम करता रहा उसको! ये देखा उस गौरांग ने, धक्क! धम्म! बैठ गया नीचे, थोड़ी देर तक तो ऐसे ही बै...
यहाँ मैंने, पूर्ण आह्वान कर लिया था, अंतिम आहूत करने पर, भयानक शोर गूंजा! अस्थियां गिरने लगीं आकाश से! और कंक-मालिनी अवतरित हुई वहाँ! ...
बहुत तेज! औघड़ अब क्रोध में था! भयानक क्रोध में! "धूमाक्षी! प्रकट हो!" वो बोला, भूमि पर पड़े पत्ते, घास, सभी उड़ चले, तेज वायु चली! ...
