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उछलता! कूदता! और ललकारता उसको! गालियां देते जाता, और हँसता जाता! हँसता जाता! वहाँ! वहाँ तो श्मशान भी काँप उठा! वो प्रकाश-पुंज,...
अर्थात! मेरी सुन ली थी श्री वपुधारक ने! मैंने मन ही मन, उनको नमन किया! वो प्रकाश-पुंज, इतनी तीव्र गति से घूमा मेरे चारों ओर, कि प्रक...
मैं शांत! और स्तुति करते करते, मैंने सभी अष्टांगनाएं पूर्ण कर लिए! कर लिए महावीर जागृत! श्री वपुधारक को शीश नवाया मैंने! और भूमि की मिट...
दिव्य-प्रकाश से नहाये हुए थे वो! परन्तु, वो देव-कन्या प्रकट नहीं हुई थी! मात्र प्रकाश रूप में ही, प्रकट हुई थी! अट्ठहास कर रहे थे, व...
मैं उठा, और फिर, त्रिशूल लिया! एक घेरा खींचा, और कंपक-मुद्रा में बैठ गया! ये एक विशेष मुद्रा होती है! इसमें श्री वपुधारक के चौंसठ वी...
पीछे मुड़ा वो! और लपक कर, एक पात्र उठाया, सोने का पात्र, और फिर, आव देखा न ताव! खोल दिया वो पात्र! तभी! वहाँ सुनहरा प्रकाश कौंध उठ...
और भागी उनके पीछे, वे सीधे अपनी सरंक्षिका, ब्रह्माणी के समख प्रकट हुईं! तभी प्रकट हुई वहाँ औडिम्बा! औडिम्बा को देख, सभी वहाँ से लोप! ...
क्या पशु, और क्या कीट, क्या जलचर! सभी को जड़ मार जाता है! वहाँ, वहाँ ब्रह्माणी प्रकट हुई! रौशनी बिखेरती हुई! गले में पुष्प-माल धारण क...
और आग लग कर, स्वतः ही भस्म हो जाते! और तब, जैसे आकाश फाड़ती हुई कोई आकृति, वहाँ प्रकट हो गयी! मैं दौड़ पड़ा! अपने केश कंधे पर किये, ...
फूल भी गिरे! काले से फूल! बैंगनी से फूल! ये ब्रह्माणी का आगमन का सूचक था! वो किसी भी क्षण वहाँ आने ही वाली थी! और यहाँ मैं अब खड़ा हुआ, ...
और अब मैंने उसको अभिमंत्रित किया, आधी को बीच में से काला डोरा रख कर, भस्म से लीप दिया! और किया अट्ठहास! मेरी देख लड़ी उस से, वो ब्रह्माण...
अलख में! अब मैंने मोर्चा सम्भाला, औडिम्बा! हाँ, औडिम्बा! ये भी एक प्रमुख सहोदरी है, एक दश महा-विद्या में से एक महा-विद्या की! इसको क...
चौंसठ अन्य उप-सहोदरियों द्वारा सेवित है! रौद्र है! भयानक है! एक सौ एक रात्रि की साधना ही इसकी! अत्यंत क्लिष्ट साधनाओं में से एक है! वट-...
अब था भीषण द्वन्द! आन का द्वन्द! अलख तक गया वो! और फिर एक नाद किया! और वो रक्त, अलख में झोंक मारा! दूसरे औघड़ ने उसमे ईंधन झोंका! अ...
अब वो दूसरा औघड़, खाया भय! दिमाग चलने लगा था उसके गुरु का अब! अब वो स्व्यं दुविधा में पड़ा! क्या करे? भाग जाए? बचा ले प्राण? या खड़ा...
