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किसी क्रिया के संबंध में हम यहाँ आये थे, क्रिया तो पूर्ण हो चुकी थी, बस वापसी करनी थी, लेकिन दो दिन से बारिश ने लगाम कस रखी थी! शहर जाने क...
इस माह आद्रा फिर आ रही है दिल्ली, हमेशा की तरह! मित्रगण! सत्य की राह नहीं छोड़िये! चाहे प्राण ही चले जाएँ! असत्य के सिंहासन से अच्छा है,...
अब तक वो मेरे संपर्क में है, बातें तो रोज ही होती हैं! माह में एक बार, मुझसे मिलने भी आती है! वो खुश है! और मैं भी! बाबा पांडु ने, ग...
और अपने गुरु का ध्यान किया, और आद्रा को बहुत बहुत, आशीर्वाद दिया, झड़ी लगा दी उन्होंने! अब उसको मुक्त करना, बाबा की ज़िम्मेवारी थी! मि...
मुझे भी भावुक कर दिया उसने! "आद्रा! अब मुक्त हुईं तुम!" मैंने कहा, वो रो पड़ी! मैंने बहुत समझाया उसको! बहुत सी बातें कीं उसने! "अब अपने ...
और फिर चाय मंगवा ली उन्होंने, चाय पी, "अंत हुआ गौरांग का" वे बोले, प्याला छूट जाता मेरे हाथों से उस समय, "बचा नहीं?" मैंने पूछा, "बच तो...
बब पांडु, अपनी भीगी आँखों से मुझे देख रहे थे, वो उठे, और मेरे पास चले आये, मुझे गले से लगा लिया! और उनकी रुलाई फूट पड़ी! उन्होंने कुछ...
वाचाल का अट्ठहास हुआ! वाचाल के अट्ठहास ने द्वन्द-विजय का नाद बजा दिया! मैंने गौरांग को देखा, चार लोग उठाये ले जा रहे थे उसको, भाग भाग कर! ...
चिल्लाया, और फिर से वो अपनी अलख के पास आ गिरा! अब अचेत था वो! फिर से उठा वो हवा में, और ऊपर उड़ा, नीचे गिरा, पेट के बल! जबड़ा टूटा, ...
और बाद, अब मैंने उद्देश्य बता दिया उसको! वो क्षण में ही लोप हुआ! और वहाँ प्रकट हुआ! दुःवज्र प्रकट हुआ! भीषण आग के ताप हुआ वहाँ! घास ...
बार बार, मेघा, मेघा, चिल्ला रहा था! मैंने फिर से सावधान किया उसे! उसने फिर से झिड़का! और हंस पड़ा! और खड़ा हुआ! गालियां दीं उसने मुझे! ...
देख लड़ी! जान गया था गौरांग! और अब विक्षिप्तता के लक्षण दिखा रहा था! उसेन वहीँ मूत्र-त्याग किया, और फिर मदिरापान! कोई बचाव-क्रिया नहीं! ...
नहीं माना फिर भी! बस! अब उसको सीख देना लाजमी था! अब मैंने भोग-थाल व्यवस्थित किये, दो दीप आसपास जलाये, और फिर अपने रक्त का प्याला उठाया,...
एक आह्वान किया! और अब, अलख पर आ बैठा! अब बाजी मेरे हाथ में थी! पर वो गौरांग! ये जानते हुए भी, कि बाजी पलट चुकी है, नहीं माना! स...
