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उसने उठाया उसको, और लिटा दिया नीचे, अब मैंने उसके शरीर के चारों और आटे से, मंत्र पढ़ते हुए एक रेखा खींच दी, और उसके शरीर पर तीन जगह आटा छिड़...
स्याह धुंए का सा रूप लिया था उसने, लोप होते हुए इस बार! स्याह धुंआ! और फिर लोप! वो लोप! और धड़ाम गिरी नीचे श्रुति! मैंने उठाया उसको, ...
दाने बिखर गये उसके! मैं खतरे में पड़ा! मैंने फ़ौरन ही धूषमांगी विद्या का संधान किया! वो फ़ौरन ही पीछे हुआ! फिर लोप! फिर प्रकट! और फिर ल...
"जाना होगा!" मैंने कहा, मुझे बताया था, मेरे दादा श्री ने कि, कैसे सम्मुख होना होता है किसी ब्रह्म-पिशाच से! मैंने वैसा ही किया था! मेरे...
फिर जैसे, कच्चा बांस का पेड़ चरमराया हो! मैं हिला! जैसे नाव पानी की लहरों में उठती है और फिर, नीचे लग जाती है, ऐसे! और सामने! सामन...
वो अपने आपे में नहीं है! उसका शरीर, मस्तिष्क, सब संचालित कर रहा है वो! किसी भी पल, आ धमकता! परन्तु मैं तैयार था! आज तैयार हो कर आ...
अर्थात! वो ब्रह्म-पिशाच जान गया था कि मैं वापिस आया हूँ! "अनुज?" मैंने कहा, "जी?" वो बोला, "श्रुति को बुलाओ" मैंने कहा, श्रुति को बुलाय...
इसी कारण से स्त्रियों को भारी चांदी की तगड़ी बाँधने का प्रचलन हुआ करता था! गाँव-देहात में आज भी ऐसा देखा जा सकता है! इस से गर्भाशय स्थिर और दोषरह...
और हम चल दिए! मित्रगण! इस बार सामना एक ब्रह्म-पिशाच से था! विद्यायों में लड़ाई थी! वो नैसर्गिक रूप से शक्तिशाली था! परन्तु! परन्तु उस...
मुझे इसमें तीन दिन लगे! लेकिन मैंने क्लिष्ट विद्याएँ सींच लीं, और कर लिया पोषित! अब होना था द्वन्द! एक औघड़ का, और एक ब्रह्म-पिशाच का! ...
मैं और पूछा, "कहाँ गए थे?" मैंने पूछा, "कौसानी" वो बोला, कौसानी! सम्भव है! यहीं से लगा हो वो उसके पीछे! "कौसानी से आते ही उसने अपना ...
हम पहुंचे अपने एक जानकार के पास, ये एक गाँव था, यहीं थे हमारे जानकार, मैंने उनको बताया, और फिर रात्रि वहीँ रहा! अगले दिन मैंने श्रुति क...
मैं उठा, वे सभी घबराये! अंदर बैठी श्रुति मुझे देख, हंस रही थी! मेरी कोहनी, उलटे हाथ की, नहीं हिल रही थी, फ़ौरन ही मुझे अस्पताल ले ...
खड़ा था, एक ब्रह्म-पिशाच! इस से पहले कि मैं कुछ और पढ़ता, कुछ करता, उसने मुझे उठाया, मेरे बाल पकड़ते हुए, और फेंक दिया बाहर! दरवाज़े ...
अब अधिक विश्वस्त और केंद्रित हो गयी! अर्थात वहाँ किसी की मौजूदगी थी! "श्रुति?" मैंने कहा, चुप! मैंने फिर से पुकारा! फिर से चुप! मैं ...
