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नहीं मानी! तो ऐसे लोगों के लिए हम, खम्ब का प्रयोग करते हैं! एक खम्भ गड़ा है वहाँ, उसी क्रिया-स्थल में, "उठाओ इसको" मैंने कहा, और उसको...
चिल्लाये! पीछे भागे! अंदर न आये! "अनुज, अंदर लाओ इसको" मैंने कहा, अनुज ने पूरी जान लगा दी, लेकिन वो अंदर नहीं आयी! रोती रही! चिल्ल...
वो ठीक थी, कोई समस्या नहीं थी उसको, वो बैठ सकती थी रात में, ये सही था, आज अनुज को भी बिठाना था मैंने, बस दूर से देखते रहने को कहा था, ...
हम लोग निकल लिए वहाँ से, अपने स्थान के लिए, रास्ते में कोई व्यवधान न हो, इसके लिए, सुरक्षा-यन्त्र से सभी पोषित कर दिए थे मैंने! रास्ते ...
नाश्ता किया, और तभी अनुज आया दौड़ा दौड़ा, "क्या हुआ?" मैंने पूछा, "उसको, उसको रक्त-स्राव हो रहा है, योनि से" वो बोला, मैं दौड़ पड़ा वहाँ, व...
"जैसे?" उन्होंने पूछा, "जैसे मासिक का कोई कपड़ा इत्यादि उस वृक्ष के समीप फेंकना, उस वृक्ष के नीचे मल-मूत्र त्याग करना, थूक देना, स्नान करना, श्रृंगा...
बड़ा ही खतरनाक है" शर्मा जी बोले, "हाँ, है" मैंने कहा, "करो जी इसका इलाज" वे बोले, "अभी तो खेल शुरू ही हुआ है शर्मा जी" मैंने कहा, "मतलब?" ...
और फिर शर्मा जी से सारी बात कह सुनायी! उस स्राव के बारे में भी! शर्मा जी हैरत में पड़े! और अब अनुज भी! उसकी वो सोच, बदल गयी! "अनुज?" ...
"श्रुति?" मैंने फिर से कहा, फिर चुप! अब मैंने दरवाज़ा खोल दिया, अनुज बाहर ही खड़ा था, भाग कर अंदर आ गया, श्रुति को देखा, तो लपक लिया श...
जान पर बन जाती उसकी! मैंने फिर से, 'बाण' प्रहार किया! वो छिटका! और श्रुति खड़ी हो गयी! मुझे देख, रोने लगी! बहुत तेज! उसकी चीख अ...
अट्ठहास! मैं आगे बढ़ा! श्रुति की तरफ! और पकड़ लिया श्रुति को उसके गले से! ये देख ब्रह्म-पिशाच भड़क उठा! मेरे पास आ नहीं सकता था! "इसको ...
उसके उठाते ही, श्रुति को, योनि-स्राव हुआ, वो टपकता हुआ फर्श पर आ गिरा! जहां जहां उस ब्रह्म-पिशाच पर गिरा, वहाँ वहाँ रक्त के छींटे बनते ...
और अगले ही पल सब शांत! श्रुति दांत भींचे मुझे घूरे! उसने अपने दोनों हाथों के पंजे फैला लिए! जैसे मुझ पर वार करने वाली हो! और अगले ही पल टक...
ये क्या हुआ? मैं तो निश्चिन्त था कि वो गया! नहीं! वो नहीं गया था! वो तो इसको ले गया था अपने साथ! समझे आप मित्रगण? श्रुति के सूक्ष्म-...
लगता था, चला गया था वो! अब तक तो लौट आना चाहिए था उसको! लेकिन नहीं लौटा था! ये अच्छी बात थी! ऐसे ही मान जाए, तो इस से बढ़िया और क्या!...
