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और फिर आया कमरे में, जहां शर्मा जी और अनुज के पिता जी बैठे थे, मुझे देख खड़े हुए वे, मैं बैठा, और बता दिया उनको अब तक का सारा हाल, वे चि...
बीमार सी हो जाती थी, इतना कि, उठा भी नहीं जाता था उस से! ये सब उस ब्रह्म-पिशाच की माया का प्रभाव था! "श्रुति?" मैंने पुकारा, उसने मुझे ...
लोप हो गया! मैं अब संयत हुआ! तैयार! चाक-चौबस्त! वो लोप हो गया था! चला गया था! मैंने प्रतीक्षा की, काफी देर तक, नहीं आया, चला...
अंजुल बनाया, और ऊपर किये हाथ! वैसुकुंड-विद्या! क्या बात है! ऐसा कोई औघड़ नहीं जो ये विद्या नहीं चाहेगा! ये मिल जाए, तो फिर देवता के स...
मेरी विद्या ने सामूल नष्ट किया उसकी विद्या को! और मैं संयत हुआ! वो चकित! हैरान! अवाक! कैसे हो गया ये? कौन है ये? कैसे डट गया? ...
कम्पकुन्जिनी ने झेल लिया उसे! अब मैं हंसा! अट्ठहास लगाया! उसने यक़ीन नहीं हुआ! ओद्युत् विद्या कट गयी थी! नहीं तो मेरे शरीर के, परखच्च...
और फिर संचालन! उस से टकरायी! वो चला अब दूर! जूझा! अनुभव क्र. ७२ भाग २ By Suhas Matondkar on Saturday, September 27, 2014 at 10:45pm और...
खौफनाक अट्ठहास! "एक मनुष्य!" वो बोला, ठहाका लगाते हुए! "एक मनुष्य!" उसने कहा, उपहास उड़ाते हुए! "मेरा क्या कर लेगा तू?" वो बोला, "बस!...
शोर हुआ, जैसे मनों पानी फूट पड़ा हो किसी घड़े से! ऐसा अट्ठहास! मैं खड़ा था! कूष्माण्ड-विद्या जागृत किये! और अगले ही पल वो हुआ प्रकट! मह...
भूमि पर! वो उड़ चला! दूर! बहुत दूर! सम्भव है कौसानी ही चला गया हो! और अगले ही पल! अट्ठहास! प्रबल अट्ठहास! लौट आया वो! आ गया ...
"जा! जहां से आया, वहीँ जा!" मैंने कहा, उसने छोड़ा उसे! आगे आया, "आज के बाद, यदि फिर से इसे तंग किया, तो भस्म कर दूंगा तुझे!" वो बोला, मैं ह...
है इसमें ऐसी क्षमता! मात्र देखने से ही घात-दृष्टि लगा देता है! क्रुद्ध होने पर तो सर्वनाश कर देता है! मुझे सम्भल के चलना था! बहुत सम्भल के...
भुजाएं मजबूत! मदमत्त हाथी को भी थामने वाली उसकी भुजाएं! कोई देख ले तो गश खा जाए! उसने फिर, देखा अपनी प्रेयसी को! और अगले ही पल! रस्स...
झटके से सर उठाया! आँखें चौड़ी किये हुए! दांत भींचे हुए! गुर्राती सी! अटपटी भाषा बोलती हुई! थूकते हुए! और फिर अट्ठहास! ठहाका! मे...
कराह पड़ी! और नीचे बैठने को झुकी! "बुला?" मैंने कहा, वो रोये! छोड़ दो! जाने दो! रहने दो! मर जाउंगी! यहीं मर जाउंगी! माफ़ कर दो...
