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अगले दिन हमारी मुलाकात काकी जोगन से हुई, उससे सामान खरीदा और फिर कलकत्ता के एक गुप्त-स्थान में आ गए, 3 दिनों तक यहीं रहे, तदोपरांत वापसी दिल्ली की राह...
वार्तालाप करने का, कभी किसी दूसरे रोज़ आके मुझे मिले और हाँ, आने से पहले मुझे इत्तला अवश्य करे, वो वहाँ से चला गया, मैंने महसूस किया की उसको मुझसे ऐसी...
मैंने फिर से अपने एक साथी को बुलाया, "वासुदेव, इधर आ, आसन लगा" वासुदेव आया और आसन लगा लिया, मैंने मंत्र पढ़े, पानी डाला, वासुदेव गिरा, लेटा और फिर आलत...
उसने घर का पता बता दिया, "अभी तुम कहाँ हो?" मैंने पूछा, "झुग्गियों में हूँ, मेरे पास जूतियाँ नहीं हैं, इसीलिए" वो बोला, "किसकी झुग्गियों में हो?...
"अर्थात तुम ये सब सीखने के लिए अपनी ज़िम्मेवारियों से भागना चाहते हो!" मै बोला, "नहीं गुरु जी, मै उनका भी निर्वाह करूंगा!" वो बोला. "कैसे? मैंने प...
मै उसको डराना चाहता था, लेकिन वो डरा नहीं, मुझसे बोला, "मेरे मन में अनेकों प्रश्न हैं, जिनका कोई उत्तर नहीं देता, कृपया मुझे उसके उत्तर दें" ये कह के ...
इंसान यदि ठान ले, तो क्या असम्भव है? कुछ भी नहीं! हाँ ख़लील, आ जाता है मिलने के लिए! अक्सर ज़िक्र कर दिया करता है हाज़िरा का! मुझे छेड़न...
मैंने अबरार को आखिरी बार तभी देखा था! सब ठीक हो गया था! सब! किशोर साहब ने बहुत धन्यवाद किया हमारा! हम वापिस हुए! ख़लील दुबारा आया! मै...
"माह में एक बार, इसको देख सकता हूँ?" उसने कहा, "नहीं!" मैंने कहा, "एक बार?" वो बोला, "बिलकुल नहीं" मैंने कहा, "रहम कीजिये" वो बोला, "नह...
कई बार! और फिर, वे सभी लोप हुए! बस, रह गया अबरार वहाँ! "जाओ अबरार! अब जाओ!" मैंने कहा, वो बैठ गया! दुखी, परेशान! उसने जो सो...
लेकिन हुआ कुछ नहीं! पल्ल्वी, निढाल ही रही! "बस अबरार!" मैंने कहा, उसने मुझे देखा, एक थके-पिटे खिलाड़ी की तरह! "वो महज़ तेरे असरात थे! जिन...
अपना जिन्नाती असर चढ़ाना शुरू किया उसने! लेकिन! नहीं जागी वो! उसने मुझे देखा, घबराया हुआ सा! फिर आवाज़ दी उसने उसे! कोई असर नहीं! न...
शर्मा जी भी बैठ गए, अब मैंने कलुष-मंत्र चलाया, और अपने, और शर्मा जी के नेत्र पोषित किये! एक घंटा बीता, कोई नहीं आया, और फिर कोई और आ...
अब कोई डर नहीं! ऊँट, हमारी ही करवट बैठा था! अब अबरार क्या करेगा, ये देखना था बस! मित्रगण! दस बजे, और घर के सभी लोग सोये, केवल ...
