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एक तो मन में भय और दूसरा सामने का विहंगम दृश्य! सब कुछ विचित्र था! फिर मुझे वहाँ दो और मनुष्य दिखाई दिए! वृद्ध और सफ़ेद वस्त्र धारण किये! लम्बी लम्बी द...
"नहीं कदापि नहीं" मैंने कहा, उन दोनों ने एक दूसरे को देखा फिर दूसरा बोला, "तू यहाँ धन के लिए आया है न?" वो बोला, "नहीं, मुझे धन नहीं चाहिए, मै च...
करता है वैसे ही सात्विक मान्त्रिक शक्ति प्राप्त कर ऐसे सहोदरों को भी प्राप्त करता है! ये अमोघ होते हैं! केवल सामने ही देखते हैं! शत्रु के शरीर को बिना...
रखे, मांस से भरे हुए, और एक बड़े से पात्र में मदिरा! पण के पत्ते, तम्बाकू के पत्ते, बरगद के पत्ते, पीपल के पत्ते, कीकर के डालें, और मानव-अस्थियाँ! फिर ...
"मैंने कहा यहाँ से लौट जा" उन्होंने गुस्से से कहा, "आपसे बात किये बगैर नहीं जाऊंगा" मैंने कहा, वहाँ खड़े लोग मेरी 'धृष्टता' देखर चौंक पड़े! "नहीं!...
उसकी पत्नी थी, उसके नौकर-चाकर आगे पीछे चल रहे थे! मै थोडा और आगे गया, वहाँ कुछ पुरुष किसी फूस जैसी चीज़ को खंगार रहे थे! आगे जाने पर एक तालाब पड़ा, आसपा...
"ठीक है" वो बोले, मैंने मंत्र वापिस किया और वापिस हो गए! अब तक का जो मेरा अवलोकन था उसके अनुसार ये स्थान या तो कोई गौशाला या कोई आश्रम आदि रहा होगा,...
थोड़ी देर बाद मुझे फिर से गाय के रंभाने का स्वर सुनाई दिया! ये मुझे कोई गौशाला सी प्रतीत हुई! मैंने शर्मा जी से कहा, "शर्मा जी लगता है ये कोई गौशाला ...
"जी कहते हैं कि कोई गिनती ही नहीं जी" अनिल ने कहा, "अच्छा! क्या समस्या आती है वहाँ?" मैंने पूछा, "जब भी कोई कारीगर कुछ करता है तो उसको कोई उठा के ...
एक घंटा हुआ! थोडा और समय हुआ! फिर आलम नीचे बैठा और अपना शरीर अमल से बाँधा! फिर अपने चेले दानिश का भी! अब नीचे बैठा आलम पढने लगा अपना अमल! वो ठीक साम...
जाए! पनाह मिल जायेगी! यदि नहीं तो कुत्ते की मौत मारा जाएगा!" कुछ नहीं हुआ! कोई नहीं आया! अब तांत्रिक ने अपना चिमटा बजाया! पीछे पीछे उसके चेलों ने भी...
श्यामा ने वहाँ तीन दिनों की अखंड पूजा की! फिर उसके बाद भूमि-पूजन किया! चार दिन गुजर गए! चार दिनों के बाद श्यामा ने काम करना आरम्भ करवाया! उसने जांच की...
कपडे की एक पोटली निकली! उसे बड़ा आश्चर्य हुआ! उसने वो पोटली उठायी, पोटली खोली तो उसमे सोने के ११ सिक्के निकले! सरजू ने वो सिक्के फिर से पोटली में रखे औ...
और उदित को भी, मैंने शर्मा जी और उदित को मिट्टी में अपने तंत्र-त्रिशूल से मंत्र-खचित वृत्त में ही सीमित रहने को कहा, उदित आँखें फाड़ के ये सब-कुछ देख ...
