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बहुत बुरी बीती थी इथि पर! कहते हैं, ऐसा कई दिनों तक रहा! फिर उसमे विक्षिप्तता आती चली गयी! वो नित्य तालाब तक जाती और मध्यान्ह उपरान्त घर वापिस आ जात...
"मुझे भी संग ले चलो" कहा इथि ने! शांत विपुल! "ले चलोगे?" पूछा इथि ने, अश्रु बह उठे पूछते हुए! सीने में वायु जम गयी! "ये सम्भव नहीं इथि, ये आ...
ये तो सभी जानते हैं! मनुष्य हैं तो मनुष्य का ही पक्ष सर्वोपरि है हमारे लिए तो! कुछ न बोली इथि! "मैं आज पुनः आया यहाँ, आपसे मिलने, विवश हो कर!" व...
उस रात, मध्य-रात्रि में, सोयी थी इथि, सोयी क्या पलकें ढांपी थीं, नींद तो कब की छोड़ जा चुकी थी! प्रकट हुआ गांधर्व कुमार विपुल! चमकता हुआ और द...
गिर पड़ी इथि! मित्रगण! सुना है ऐसे ही इस अवस्था में चार दिन बीत गए! इथि अपने घर में अपने बिस्तर पर पड़ी रही! सभी चिंतित थे! माँ बाप का कलेजा फटन...
जो भी इथि को देखे वही दंग! हड़कम्प सा मचा दिया इथि के सौंदर्य ने! पहुंची स्नान के लिए, निवृत हुई और फिर पल्ली संग इथि चली पल्ली के घर! वहाँ जिसने...
पहचान ही न सकी इथि को! इतनी सुंदर स्त्री कभी न देखी थी उसने! कभी कल्पना में भी नहीं! वो समझ गयी! समझ गयी! सब समझ गयी! ये 'उसी' का चमत्कार ...
यक्षिणी सी! शरीर सम्पुष्ट हो गया! केश सुनहरी-श्याम हो गए पूर्ण रूप से! स्त्रियों में श्रेष्ठ हो गयी! ऐसी कि कोई देवता देख ले तो मानव रूप में ज...
चिंतित? अब चिंता के अलावा है ही क्या शेष इथि के पास? "बताओ इथि?" बोला विपुल! क्या बताये वो! आप ही बताओ हे गान्धर्व कुमार! क्या बताये वो! व...
आँखों में बस वही स्वरुप! वो तो जैसे किसी भटकती आत्मा के समान अटक गयी थी काल-खंड में! और काल-खंड भी क्या चुना! विपुल के संग का काल-खंड! जो स्वय...
अब माँ के आंसू निकले! बैठी बिस्तर पर, रोते रोते पुकारा, "इथि?" इथि शांत, बस आँखें खोलीं! "क्या हुआ तुझे मेरो बच्ची?" माँ ने रो रो कर अब आसमा...
वो चलती गयी उस मार्ग पर! वृक्ष पार हुए! मार्ग छोटा हुआ! मंदिर का आकार बड़ा हुआ! वो चलती गयी, गाँव में प्रवेश कर गयी! कुछ जान-पहचान वाले लोगों...
अंतर्द्वंद में फंसी अब! "लौट जाओ इथि" विपुल ने कहा, इथि ने नेत्र बंद किये! अश्रु की कुछ बूँदें नेत्र-पटल से न चाहते हुए भी छलक गयीं! और सब...
"मुझे प्रेम करती हो?" विपुल ने पूछा, "हाँ" उसने अब स्वीकारोक्ति की! "मैं गान्धर्व हूँ, जानते हुए, अब भी?" विपुल ने पूछा, "हाँ" उसने कहा, "एक ग...
छोटे बड़े दिव्य-पुष्प! शीतल मंद बयार! क्या ये स्वर्ग है? यही सोचा इथि ने! वो हैं कहाँ? चारों और देखा! वो कहीं शिखर पर थी! विपुल के साथ! ...
