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पिता जी स्तब्ध! कहीं फिर से विक्षप्ति न आ जाए? कहीं फिर से इथि में परिवर्तन न आ जाए? कहीं रंग में भंग न पड़ जाए? लेकिन वे एक पिता था! हाँ कह ...
सच कहता हूँ! हार गए आप! और फिर मित्रगण! ब्याह के दिन से एक दिन पहले................. और फिर एक दिन पहले मित्रगण! सुबह सुबह की बात है, कु...
अब इथि के मध्यान्ह मात्र उस कक्ष में गुजरते! खिड़की से बाहर झांकते हुए! कभी कभार तो सूर्य पर टिकी दृष्टि चाँद पर समाप्त होती! कैसा अथाह प्रेम किय...
जो कहा था इथि के पिता जी ने! वे घर गए उदय के, एक पंडित जी के साथ और दिन पक्का कर, रसम-रीत कुछ नहीं, केवल विवाह! विवाह संपन्न हो किसी भी तरह! ये ...
बहुत हुआ ये प्रकरण! अब जो हो सो हो! गाँव भर में उपहास उड़ाया जाता है! बोलने वालों के होंठ नहीं सिये जाते! बोलने वाले बोलते हैं! यही सोचा अपबा...
एक न एक दिन, आएगा वो! अवश्य ही! विवश होकर! हाँ! विवश होकर! फिर! कोई न आता! वापिस घर आ जाती इथि! हमेशा की तरह! अब घरवालों का भी...
दरवाज़ा खुला और धड़धड़ाती भगा पड़ी इथि! घर से बाहर! तेज भागती! हांफती पहुँच गयी उसी वृक्ष के नीचे! रोजाना की तरह! प्रतीक्षा में! आंसू बहाते! र...
दो बार, तीन बार! अनेक बार! लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला! नहीं खोला इथि ने! माँ ने खूब प्यार से कहा, मिन्नतें कीं, लेकिन कुछ नहीं! तब हार कर वे व...
नहीं उठी इथि! लेटी रही! "इथि??" माँ ने पुकारा! कोई उत्तर नहीं! नहीं जागी इथि! माँ ने कई बार पुकारा! आखिर में उसका हाथ खींच कर उठाया, ...
इथि की माँ ने दरवाज़ा खोला! ये कौन हैं? कहीं भटक गए हैं! हम ठहरे निर्धन किसान! और ये व्यवसायी लोग! अब उदय की माता ने हाथ जोड़कर नमस्कार किया! ...
उनको बताना होगा कि कभी ब्याह न रचाने वाले उनके पुत्र ने ब्याह करने का निर्णय ले लिया है! वे उसी शाम अपने नगर की ओर चल पड़े! दो दिन बाद पहुंचे! दो...
और बलभद्र इथि के पीछे हुआ! भटकती सी, इथि चली गाँव की ओर! कौन आ रहा है, कौन जा रहा है, कुछ पता नहीं! किसने देखा कौन रुका! कुछ पता नहीं! कौन...
उदय के अंदर उतर गयीं उसकी आँखें! उसका रूप! उसका सौंदर्य! वो मोहित हो गया! उदय मोहित हो गया उसके सौंदर्य पर! उदय उठा और वहाँ से चला, परन्...
उदय वहाँ गया! रुका और बोला, "नमस्कार!" इथि ने उसको देखा और फिर से नज़रें गढ़ा दीं वहीँ मार्ग पर! जहां कोई आया करता था लेकिन अब मार्ग भटक गया है! क...
उसने बलभद्र को भेजा पता करने! बलभद्र मित्रतावश वहाँ गया, उसने इथि को देखा तो उसको भी आश्चर्य हुआ! वो और समीप गया! उसके सम्मुख आया, मार्ग अवर...
