श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: सिरोही, राजस्थान की एक घटना

कोई खंडहर था पुराना,वहीँ खड़ा था वो नौजवान!देख रहा था टकटकी लगाये,रूपाली को!अचानक से,रूपाली की नज़रों में आया वो,"गीता?" बोली वो,"हाँ?" बोली गीता,"वो, व...

2 years ago
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RE: सिरोही, राजस्थान की एक घटना

"क्या गाँव का नाम बताया होगा उसने?" बोली रूपाली,"पता नहीं" बोली वो,घबरा गयीं दोनों!कहीं आ गया वो मुलाज़िम गाँव तो?तब तो बड़ी फ़ज़ीहत होगी?कैसे होगी अब?"क्...

2 years ago
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RE: सिरोही, राजस्थान की एक घटना

न बोलीं कुछ दोनों!माँ को ढूंढें निगाहें!और माँ, जाने कहाँ थी! शायद खरीद रही थीं कुछ!रखा दोनों ने सामान नीचे!और जैसे ही, रूपाली घोड़े के पीछे चलने को हु...

2 years ago
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RE: सिरोही, राजस्थान की एक घटना

दोनों कानों में, सोने की बालियां पहने!गोरा-चिट्टा रंग था उसका!उसकी, चमकदार, चपल आँखे, जमी थीं रूपाली पर!वो सबसे अलग खड़ा था,दोनों हाथ बांधे!रूपाली, दूर...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

ये कैसा प्रेम था इथि का! और ये कि, विपुल क्यों आया था वहाँ उस क्षण? इस प्रश्न का उत्तर न मुझे कभी मिला, और सम्भवतः न मिल सकेगा! एक थी इथि! -...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

देह त्याग चुकी थी इथि! गांधर्व कुमार ने प्रलाप में हुंकार भरी! सभी काँप गए! बस धरा फटने की कमी थी! और अगले ही पल! वो लोप हुआ! इथि के शरीर ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

सभी दंग रह गए! जो जहां था वहीँ गड़ा सा रह गया! पंडित जी पत्थर से बन गए! उदय मारे भय के काँप गया! माँ बेहोश हो गयी! पिताजी सन्न! सामने एक गा...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

वो भी देख रही थी उस समय वहाँ का दृश्य! जब इथि ने हाथ नहीं दिया तो उदय ने ज़बरदस्ती हाथ उठाना चाहा! ज़बरदस्ती! नहीं मानी इथि! उसने और ज़बरदस्ती की...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

फेरों का समय आया! उदय सेहरा बांधे बैठा था वहाँ! बेसब्र! बेचैन! और उसके कुछ विशेष परिजन और मित्र! वो बलभद्र भी! तब पल्ली और कुछ विशेष परिजन...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

सबकुछ देखा इथि ने! कुछ और समय बीता, और अब बारात आने का समय हुआ! नगाड़ों की आवाज़ आने लगी! अंदर कक्ष में! क्या खूब सजी-धजी थी आज इथि! रूप खिल...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

इथि मुस्कुरायी! न जाने क्या सोचे बैठे थी! मैं समझ सकता हूँ, आपको भी भान होगा! कुछ न कुछ तो होगा ही उसके ह्रदय में! उस समय! और सखियाँ आ गयी! ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

इथि के इस व्यवहार से मैं जैसे अंदर तक सिहर गया, कुछ डर की सी भावना मुझे कुरेदने लगी! मुझे याद है, जब मैंने ये गाथा सुनी थी तो मैं सचमुच वहीँ पहुँच गया...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

पल्ली उस रात वहीँ रुकी! बहुत काम बाकी था! पल्ली की ज़िम्मेवारी थी घर की! कल विदा होनी थी इथि घर से! उस रात! इथि कमरे की खिड़की से अंदर झांकते ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

देवालय पहुंची! पुष्प अर्पित किये! और फिर, और फिर पल्ली संग वापिस आ गयी अपने घर! मंडप सजा था! उसने सबकुछ देखा! अपनी माँ को देखा! अपने पित...

2 years ago
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