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कितना दूर है अभी तो!तीन सुबह और तीन शाम!ये तो सदियाँ हो गयीं!अब न तो नींद ही आये,और न जागे ही बने!न खाना ही अच्छा लगे,न प्यास ही जागे!प्यास, हाँ, एक प...
उसका ही दिखे!उसकी आवाज़ सुनाई दे!वो भारी सी आवाज़!वो रौबदार चेहरा!तो ताक़तवर देह!वो चमकीली आँखें!बस उसी का वो अक्स!अपना कुछ नहीं!अपना होता भी कहाँ से?वो ...
"हूँ?" दिया जवाब!"मेले में है क्या?" बोले गीता!"चल!!" बोली रूपाली!"वैसे, है तो तो तेरे लायक ही!" बोली गीता!तार झनझना गए!रूपाली को, एक सर्द सी फुरफुरी ...
थूक न निगला जाए!जो आँखें, सामने देखें,वो बेमायनी सा लगे!कुछ जैसे, सुनाई न दे!ऊँट-गाड़ी की चूं-चूं जैसे,तूफान की आवाज़ सी लगे!जब न बनी, तो देखा पीछे!दूर,...
नज़रें हटीं!उस दर्पण पर, पकड़, कस गयी उसकी!कसी, तो दर्पण से, आँखें मिलीं!पहली बार!पहली बार उसकी आँखों में नए से भाव आये थे!एक अलग सा भाव!देख न सकी!रख लि...
वहां नहीं था वो!एक बार फिर से तलाश की,और इस बार, गीता की नज़र भी संग थी!"वहाँ तो कोई नहीं?" बोली गीता!एक पल के लिए,ये सवाल, अनसुना सा हो गया!न सुना रूप...
लाल हुआ आसमान,लाल कर गया रूपाली को!और वो,नौजवान,चला गया दूर,दूर,हो गया ओझल!रूपाली,नज़रें न हटा सकी उस से,एक बार भी, पीछे मुड़कर न देखा उसने!सामान समेटा ...
सनसनाहट रेंगी!रोएँ, खड़े हो गए!साँसेंथोड़ा, गर्म गयीं!एक अनजान!पास में खड़ा!कैसी मुसीबत?जब सामने था,तो नज़रों का खेल था,अब सामने है, तो,नज़र भी शरमाये!"लीज...
नहीं था वो नौजवान वहाँ!ओहो!रूपाली ने, टटोल लिया!सारी जगह टटोल ली!न मिला वो!कहाँ गया?अभी सोच में डूबा था कि,"वो दर्पण दिखाइए?" आई एक मर्दाना, मधुर सी आ...
बस, लिख ही दिया करता हूँ!अब जैसा बन पड़ता है!"तू है कहाँ?" बोली गीता, और भांपा मामला!देखा एक जगह!वहीँ,जहां वो नौजवान खड़ा था!"रूपाली?" बोली गीता,न सुने ...
जैसे अपने आप में ही उलझ गया हो,नज़रें झुका लेता था,कई कई बार तो,नज़रें चुराने लगता था! और कई बार,संजीदगी से, नज़रें लड़ाता रहता था!नज़रों का खेल था सब!नज़रे...
नज़रें कहीं अटकी थीं, ढूंढ रही थीं कुछ!गीता ने फिर से आवाज़ दी!तब देखा गीता को उसने!अब बिठा लिया फिर से!रूपाली बैठ गयी! देखने लगी कि गीता और क्या लेना च...
उस पर भी नज़र डालते थे!वो कोई, रजवाड़े के खानदान से हो,ऐसा लगता था!वेश-भूषा भी ऐसी ही थी!और डील-डौल तो सबसे ज़बरदस्त!एक ही हाथ से,एक भरे-पूरे इंसान को, ह...
और चल दीं वापिस अपने गाँव!गाँव पहुंच गयीं दोनों!और बात, आई गयी हो गयी!तीन दिन बीते!और फिर से अवसर मिला जाने का,अबकी बार, बड़ी बहन जा रही थी साथ, माँ तो...
गीता को कुछ समझ न आये!"जा?" बोली रूपाली,तो, भारी क़दमों से, आगे चली गीता,आय उस नौजवाब के पास,उसके कंधों से भी नीचे थी गीता!सर झुका के देखा उस नौजवान ने...
