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दो दिन बाद?कैसे भूलेगी वो?कैसे?न! सोचना भी पाप सा है ये तो....तो करे क्या?कह दे?बता दे उसे?न!इतनी हिम्मत नहीं है उसमे,वो कहे तो सर हिलाया जा सकता है, ...
और खरीदा गया सामान रख लिया गया!और अब चले वो गाँव की तरफ!देखा फिर से एक बार वहीँ!दूर, वहीँ पत्थर को ढूँढा!न दिखा पत्थर, उचक-उचक के देखा!ऊँट-गाड़ी चल दी!...
वो हंस पड़ा!आया आगे!रखा सर पर हाथ गीता के,"हाँ! पक्का!" बोला वो,एक बड़े भाई की तरह से हाथ रखा था गीता के सर पर!"हम चलें?" बोली गीता,"आपकी मर्ज़ी!" बोला व...
मुस्कुरा पड़ा,आगे आया,और उठाया एक टुकड़ा!रखा मुंह में,और हुआ पीछे!उठाया पानी का बर्तन,और पीया पानी!आँखों में, रूपाली को रखे!मिठाई खातीं रहीं वो! और रणवी...
रूपाली की आँखें नीचे!सर नीचे!रणवीर ने पानी उठाया,"आप पिएंगे गीता, रूपाली?" पूछा उसने,"नहीं!" बोली गीता!"और आप? रूपाली?" पूछा उसने,सर हिला दिया!गिलास, ...
हंस पड़ा वो, गीता के इस मासूम से सवाल पर, हंसी छूट गयी उसकी!"ऊँट-गाड़ी से नहीं! अपने घोड़े से!" बोला वो,"घोड़ा? कहाँ है आपका घोड़ा?" पूछा गीता ने,"वो, देखो...
बर्तन में से पानी डालते हुए, एक गिलास में,एक गिलास, बग़ल में दबाये था वो!"लो?" बोला वो, गीता सा,दिया गिलास गीता को,और फिर बग़ल से, दूसरा गिलास लिया, उसे...
गीता, क़दम से क़दम बढ़ाये,चले जा रही थी संग उसके!क़दमों की डिग लम्बी थी आज!भीड़ में से पार होते हुए,उसी जगह जा पहुंचीं वो,देखा उस बड़े से पत्थर को,लेकिन! वो...
और जी, चल पड़ी वो ऊँट-गाड़ी!लेकिन आज तो,रास्ता बहुत ही लम्बा हो चला था!ऊँट, तेज न चल रहा था!वो, ढाढण की हवेली भी न आयी थी अभी तो?वहां से रास्ता आधा रह ज...
और किया मुंह उसकी तरफ!अब बैठी बिस्तर पर!थोड़ी देर पहले,सीने में उठा वो सवाल और उसका तूफ़ान,अब कुछ शांत थे!पकड़ी छुरी, और काटने लगी सब्जी!पहले जैसे हो गयी...
ऐसा कैसे?क्या सोच रही है वो?उसे प्रेम हुआ है?उस से?कैसे?सिर्फ दो बार ही तो मिली है वो?और फिर,चलो माना प्रेम हुआ,उस का क्या?उसे?मुझे प्रेम हुआ उस से,उस...
उसके ख़याल दिल से आखिर निकले ही नहीं!क्या करती रूपाली!कोरा काग़ज़ था दिल उसका,किसी की छाप अब मौजूद थी उस पर!जितना छुए, उतनी गाढ़ी हो!इस छाप की रौशनाई, और ...
और रूपाली,उस मेले में, कहीं और!उसकी आवाज़ सुनाई देती उसे!आँखें बंद करती, तो अक्स दीख पड़ता!करवट लेती तो अपनी ही सांसें तेज भाग रही होतीं!उनकी आवाज़ें, तू...
न बोले कुछ!"बता?" पूछा फिर से,"तू तो पीछे ही पड़ गयी?" बोली रूपाली,"जब तक नहीं बताएगी, तब तक पूछती रहूंगी!" बोली गीता,फिर से चुप!"बता?" फिर से पूछा,"हा...
जिस्म की नमी सोखता हुआ!झुलसाता हुआ!हाँ, फौरी तौर पर राहत पड़ती उसे,जब उसकी याद की शीतल बयार उसके जिस्म को सहलाती!"कहाँ खोयी है?" बोली गीता,झिंझोड़ते हुए...
