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"बोल बेटी?" बोला भगत!देखा भगत को!ले आई हिम्मत!"हाँ, सही जवाब दूँगी!" बोली वो,"सुन?" बोला भगत,पाँव मोड़े, और बिस्तर पर रख लिए,"तू कहीं आई-गयी थी?" बोला ...
आने लगा यक़ीन!कीं अब मिन्नतें कि कुछ हल निकालो!भगत ने दिया आश्वासन!"सुनिए?" बोला भगत,"जी?" बोले मोहर सिंह,"मेरी बात करवाइये उस लड़की से" बोला वो,"जी" बो...
गीता चली बाँधने उसे!"आपने जवाब न दिया?" बोली वो,"कैसा जवाब?" बोला वो,मार एक हल्का सा मुक्का, कंधे पर!मुस्कुराते हुए!"हाँ! हाँ! ठीक ठीक!" बोला वो,"क्या...
अनुभव क्र. ९६ भाग ४ "बहुत अच्छा हुआ!" बोला वो,"हाँ, सच में!" बोली वो,"क्या खूब सजी थीं आप!" बोला वो,चौंक पड़ी वो!हुई आँखें चौडीं!सवाल दागा आँखों से ह...
सच्चा प्रेम!दोनों का ही प्रेम सच्चा था!चढ़ता रहा परवान!और कुछ इसी तरह से,वो दिन भी आ गया!जिस दिन ब्याह था उसकी बड़ी बहन का!उस रोज बहुत रौनक थी गाँव में ...
अंदर ही अंदर!इस सवाल ने,छील दिया होगा उसे!कैसा घर?कौन अपना?फिर से जज़्ब कर गया!मुस्कुराया!"भेज दिया जो भेजना था!" बोला वो,अब चैन पड़ा दोनों को!"ब्याह वा...
"और रूपाली, ये आपके लिए!" बोला वो,निकालते हुए, एक सुनहरा, गुलाबी घाघरा!गुलाबी ही कुर्ती!सोने का काम था उस पर!फूल बने थे उस पर!इतना सुंदर,कि देखने वाला...
गीत-गान चल रहा था!दिन भर रौनक रहती!मोह सिंह, जौहर सिंह व्यस्त रहते!सामान, आदि का बंदोबस्त किया जा रहा था!कपड़े-लत्ते, गहने-जेवर, सब लाये जा रहे थे!एक ए...
किये टुकड़े,उठाया एक टुकड़ा,और इस तरह से रखा मुंह में उसके,कि छुए नहीं वो उसको!खाता रहा, खिलाता रहा!और बर्फ़ियाँ, खत्म!उसकी मूंछों पर, बरफी का चूरा रह गय...
जब धूप पड़ी तो!पेड़ हिल रहे थे ऊपर!हवा चलती, तो सूरज की किरणें,झाँक लेती थीं नीचे!वैसी ही एक किरण ने झाँका था!और जा टकराई थी उसकी अंगूठी से!उसने खोली पो...
इसकी एक, ख़ास जगह है मेरे दिल में!वो जज़्ब कर गया!कोई और होता,तो तोड़ देता अपनी नैसर्गिकता!रूपाली?रूपाली तो, इंतज़ार में थी,कि कब,रणवीर के मज़बूत बाजू,सरंक...
और हम सब, काले हैं!आप न हों, तो मैं तो हूँ!करता हूँ स्वीकार!चलिए वापिस इस प्रेम-गाथा में,और फिर वो दिन आया,जब एक कपड़े में बाँध, वो मिठाई, ले गयी रूपाल...
मेरे पिता श्री के मामा श्री थे, पहलवानी करते थे!दंगल में नाम था उनका!एक छलावे को, सुबह तक, गर्दन पकड़, हवा में टाँगे रखा था!छलावे को, पकड़, ज़मीन न छूने ...
कोई सेवायें देता,तो कोई स्वांग का इंतज़ाम करता!ये है हमारी संस्कृति!ये था हमारा समाज!दुःख होता है आज का, ये,आधुनिक, पढ़ा-लिखा, विस्तृत-मानसिकता वाला समा...
एक बिचौलिया लड़के वालों का,और एक बिचौलिया,लड़की वालों का!मोहर सिंह दंग!बुलाया अंदर!पानी आदि पिलाया,बिठाया, पंखा झला उनका!और फिर फूटा, घड़ा ख़ुशी का!लड़के व...
