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"नहीं जी" वे बोले, "पिता जी के समय में?" मैंने पूछा, "हाँ जी" वे बोले, "हम्म्म" मैंने अंदाजा लगाया, ये पैंसठया का चक्कर है! मुझे याद आया! अर...
"अब कैसे पार पड़ेगी?" उन्होंने संशय से पूछा, "बाबा को जगाना होगा फिर" मैंने कहा, "कोई अनहोनी न हो जाए?" वे घबरा के बोले, "होनी होती तो आज ही कर द...
एक दूसरे को तोलते हुए हम! और! मेरी शान्ति भंग हुई! भंग हुई शान्ति! मेरे होठों पर पड़ती और नाक से बहती रक्त-धारा से! टप! टप! ऐसे बहे रक्त! ...
उसका शरीर किसी वज्र की भांति था! गले में पत्थरों की सी माला पहने, कौन सा पत्थर, ये नहीं मालूम पड़ा! नीचे उसके लुंगी पहनी थी या धोती, ये भी पता नहीं चला...
"कौन है?" मैंने विनम्रता से पूछा, कोई नहीं आया, और वो वहाँ क्रोध के मारे बस फटने ही वाली थी! अब मैंने महातमस विद्या जागृत की और प्रत्यक्ष-शूल भिड़ा...
"चले जाओ!" एक मर्दाना आवाज़ गूंजी! शर्तिया ये इस नाग-कन्या की तो नहीं है? कौन है जो नेत्राम-पाश में भी नहीं है? ऐसा कौन? भय हुआ! सिहरन हुई एक...
वो पीछे हटी! कुंडली खोलते हुए! अब मैंने नेत्राम-देख चालू की! नेत्र खोले तो मैं घबराया! ये तो एक नाग-कन्या है! लेकिन यहाँ कैसे?? अब फिर से ...
ये तो दैविक सर्प है अथवा कोई यक्षाभूषण?? मैं चकराया! सच कहता हूँ, दिमाग शिथिल हो गया! और जब दिमाग शिथिल होता है तो पास, दूर और दूर पास दिखाय...
"भाग जा" तभी एक फुसफुसाहट सी आयी! मेरे और शर्मा जी के हुआ अब कान खड़े, हम थोडा पीछे हटे! "मेरे सामने आओ?" मैंने कहा, कोई नहीं आया, बस हवा का एक झ...
"चलें क्या गुरु जी?" उन्होंने पूछा, "हाँ चलिए" मैंने कहा, शर्मा जी ने बड़े बैग से एक छोटा झोला निकाल लिया! इसमें पीली अभिमन्त्रिति सरसों थी, इस से ...
उनका उत्साह भी बढ़ गया! "क्या?'' उन्होंने पूछा, "बाद में बताऊंगा" मैंने कहा, "ठीक है" वे बोले, अब हम उठे और चले वापिस, "बिरजू?" मैंने कहा, ...
बड़ी ही ह्रदय-विदारक कहानी थी वहाँ की! ओह! ऐसा क्यों होता है? क्यों? और? क्यों किया? क्यों किया उसने? क्या मिला उसको? बतायेगा! बतायेग...
"अरे बिरजू जी?" मैंने टोका, "हाँ जी?" वे चौंके, "आपके यहाँ सिवाने कहाँ हैं?" मैंने पूछा, "कोई किलोमीटर पर होंगे" वे बोले, "आज जाना है वहाँ" मै...
कर्ण-पिशाचिनी? नहीं! वाचाल? नहीं! केतकी? नहीं! खबीस? नहीं नहीं! फिर? बहुत सोचा! हल निकला उसका फिर! हल था एक क्रिया, क्रिया जिस से ...
"कुछ हाथ आया गुरु जी?" केवल ने पूछा, "नहीं" मैंने कहा, "ओह" बिरजू ने कहा, अब हम वापिस हुआ, बातें करते करते! घर पहुंचे तो नहाये धोये, बारिश थमी...
