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वो फुफकारा और वहाँ अन्य सर्प भी प्रकट हुए! उसने फिर से फुफकार मारी! और अपने बाएं चल पड़ा, जहां वो पत्थर थे! मैं समझ गया! समझ गया! प्रेयसी! प्...
हर लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा आये! मैंने सोचने का नाटक किया! "नहीं बाबा!" मैंने कहा, अब बाबा की साँसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे! "और क्या चाह...
आवाज़ में लरज़ थी उसकी, एक अनुनय, मैं रुक गया! "बोलो बाबा?" मैंने कहा, "बदल कर ले" उसने कहा, समझौता! अदला-बदली कर समझौता! "कैसी बदल बाबा?" मैं...
मुंह से अपशब्द निकाले! ठेठ तांत्रिक भाषा में! "और जतन कर लो बाबा! आज खेल ख़तम तुम्हारा!" मैंने हँसते हुए कहा, बाबा को जैसे काठ मारा मेरा व्यंग्य ...
ऐसी योनि है जो मिथ्याभाषी है, द्विअर्थी है, इसके क्रिया-कलाप सबसे पृथक हैं, कोई विरला ही साध पाता है शक्तियों को, ऐसे सम्बन्धों को! इसी निकटता का अनुच...
"कहो बाबा?" मैंने कहा, "तुझे क्या मिलेगा?" उसने अब तर्क से पूछा, "संतोष" मैंने कहा, "मैंने अपना जीवन लगा दिया, इसी को उद्देश्य बनाया है, क्या कि...
हुईं, अब प्रेतात्मा रूप में ऐसा करना चाहता था, सिद्धियाँ प्राप्त कर, रूढ़ता के आसान पर विराजमान हो कर न केवल शक्तिमान अपितु दैविक रूप भी प्राप्त करना च...
वहाँ एक नाग-कन्या उत्पन्न हुई, और पल में ही महा-पिशाचिनी के रूप में परिवर्तित हो गयी! मैंने त्रिशूल को चाटा और सामने से आती हुई नाग-कन्या के उदर में घ...
बाबा लोप! मैंने फिर से प्रत्य्क्ष-शूल भिड़ाया! बाबा फिर हाज़िर! "चला जा यहाँ से, चला जा!" बाबा ने कहा, मैं चुप रहा! एक भेजा उठाया मैंने! उस ...
"तू बच गया! बचा गया! अब जा यहाँ से" बाबा ने चिल्ला के कहा, "मैं नहीं जाने वाला कहीं बाबा" मैंने भी कह दिया, "हठ अच्छा नहीं" वो बोला, "आप भी तो ह...
"अरे बालक! हा! हा! हा! हा!" अट्ठहास! "छोड़ दो बाबा!" मैंने हाथ जोड़कर कहा, "जा! तुझे छोड़ दिया! बाबा ने छोड़ दिया!" वो बोला, "मुझे नहीं बाबा! इनको छ...
"कौन है तू?" मुझे पूछा गया, मैंने अपना परिचय दे दिया! "हूँ! समझ गया!" वो बोला, "आप इनको क्यों नहीं मुक्त कर देते?" मैंने पूछा, "कदापि नहीं" वो...
"ये! ये है दुमुक्ष! हा! हा! हा! हा!" उसने अब दम्भ से किया, मैं तो जैसे कटे पेड़ सा गिरा! क्यों? दुमुक्ष, एक नाग-पुरुष कैसे क़ैद हुआ? किसने किया?...
"जा! छोड़ दिया तुझे! जा!" उसने हंसके कहा, "चला जाऊँगा बाबा, परन्तु कुछ प्रश्न है, उनका उत्तर दे दीजिये" मैंने कहा, वो चुप हुआ! थोड़ी देर! "पूछ?"...
अब रात हुई, हम आ पहुंचे खेत, कोठरी में सामान रखा और साथ में लाये हुए कुछ खाने के सामान को बाहर निकाला, और अब होना था आरम्भ मदिरापान! मैंने और शर्मा जी...
