श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

दरवाज़ा खुला! मैं अंदर गया! बैठ गया! "चाय पियोगी?" मैंने पूछा, "अभी नहीं" उसने कहा, नज़रें नहीं मिलाईं! शायद रात की बात याद थी उसको! "अनुष...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

क्यों? ऐसे विचारों में में खो गया! कमरे में पहुंचा, शर्मा जी सो चुके थे! मैं भी लेटा, तभी फ़ोन बजा! अनुष्का! मैंने नहीं उठाया! कट गया! ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

और मेरा हाथ थामा! गरम उसका हाथ! मैं फुंका! जला! मैंने हाथ छुड़ाने को ज़ोर लगाया, नहीं छोड़ा उसने! "अनुष्का?" मैंने कहा, वो देखे मुझे, "अन...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

"छोडो" मैंने कहा, नहीं छोड़ा! पलक देखे मुझे, और मैं नज़रें चुराऊँ! कहाँ फंसा मैं! आज जैसे वो ज़िद में थी! अड़ी हुई! और मैं हद में! अपनी हद...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

सच है! क्या पता इसको! अपनी छोटी सी बुद्धि से छोटे दायरे में सोच रही थी वो! हो सकता है वो जाने ही न, अपने कहे शब्दों का यथार्थ! इसीलिए डर लग ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

मैं झटके से खड़ा हुआ! "मैं चलता हूँ" मैंने कहा और जाने लगा, "रुको?" उसने कहा, मैं रुका, रुकना पड़ा! "बैठो?" उसने कहा, मैं खड़े रहा! "बैठो?"...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

अल्हड़ता! पूरी अल्हड़! "चलता हूँ" मैंने कहा, "अभी नहीं" उसने कहा, फंस गया! क्या करूँ? "सोना ही तो है?" उसने पूछा, "हाँ" मैंने कहा, "यहाँ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

"क्यों?" उसने पूछा, "नींद आ रही है" मैंने कहा, मुस्कुराने लगी! "यहीं सो जाओ!" उसने कहा, हंसते हुए! मैंने बताया न, मुझसे खुलने लगी थी वो अब! ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

"अंदर नहीं आओगे?" उसने पूछा, "अब नहीं" मैंने कहा, "आओ न?" उसने कहा, "नहीं, अब नहीं" मैंने कहा, "आओ तो सही?" उसने कहा, जाना पड़ा! अंदर गया, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

"हाँ, करेंगे" मैंने कहा, "साले ऐसे खड़े थे हथियार ले कर जैसे क़लम करेंगे सर हमारा! इबु ने ऐसा झंडा गाड़ा कि तोते उड़ गए हरामजादों के!" वे बोले! "तभी त...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

"अब चिंता न करो, ठीक?" मैंने कहा, "ठीक" वो बोली, "अब शाम हो चुकी है, अपने कक्ष में ही रहना, जानती हो न?" मैंने कहा, "हाँ! जानती हूँ!" हंसते हुए ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

"उनको समझा दिया जाएगा, खुल कर!" मैंने कहा, "कौन समझायेगा?" उसने पूछा, "यहाँ के लोग!" मैंने कहा, "सच में?" उसने पूछा, "मैं झूठ क्यों बोलूंगा?" ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

वहाँ पहुंचा, दस्तक दी, चिटकनी खुली, और फिर दरवाज़ा! सामने खड़ी थी वो! मैं अंदर चला गया! बैठा! मैं मुस्कुराया! वो नहीं! "क्या हुआ?" मैं...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

हम! आराम से निकल आये वहाँ से! जो समझाना था समझा दिया था! अब मैंने फिर से रुक्का पढ़ा और इबु वापिस हुआ! तातार होता तो हत्याएं हो चुकी होतीं वहाँ अ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ कोलकाता की एक घटना

वहाँ अचानक से जैसे हवा चली! क्षण में ही ताप बढ़ा! और! बिंदेश्वर को पकड़ के फेंका किसी ने सामने! वो गिरा जाकर बारामदे में रखे अनाज के बोरों पर, किशन ...

2 years ago
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