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आनंददायक थी बहुत! मुझे लेटा देख, शर्मा जी भी लेट गये! मैंने तो सर की नीचे रखे दोनों हाथ, और आँखें की बंद! और नशा सा छाया! भोजन का नश...
आजकल की अटरम-शटरम से तो लाख गुना बेहतर! अटरम-शटरम खाओ, और बीमार पड़ो! पैसा भी खर्चो, और बीमारी और मोल ले लो! तो इनसे दूर ही रहिये! भोजन कर ...
और हींग की खुश्बू ऐसी, कि सूंघते ही पेट ने, मुंह फाड़ दिया! गड्ढा सा खुल गया पेट में! कटोरी में दही, हरी चटनी, अचार और कुछ सलाद! और च...
"अरे बाबा? एक बात बताओ?" मैंने पूछा, "हाँ?" वे बोले, "टेकचंद ने जहां बताया, वहाँ कोई साधन तो होगा आने जाने का?" मैंने पूछा, "हाँ, गाड़ी है, रे...
जो फूल के पौधे आदि थे, वे अभी अपनी जड़ों में लगे पानी के सहारे, मुकाबला करने में लगे! तभी वही लड़की आयी, दो गिलास शरबत लिए, वही लज़ीज़ बेल ...
यहाँ से सौ किलोमीटर? ये ख़याल आया तो वो, छह किलोमीटर की महा-यात्रा याद आ गयी! जी सा मिचला गया! कैसे जायेंगे? कोई साधन तो होगा ही? आखि...
"परसों निकलना है!" मैंने कहा, "हाँ" वे बोले, "ठीक है, दिख जाए तो बात बने!" मैंने कहा, "हाँ जी" वे बोले, और हम बातें करते रहे, फिर भोजन ...
"कभी भी चलिए?" वे बोले, अब मैंने बाबा शम्भू नाथ को देखा, वे समझ गए! "आप कब जाना चाहते हो?" उन्होंने पूछा, "जब मर्जी" मैंने कहा, "हाँ टे...
"उसने भी देखा ही होगा?" मैंने पूछा, "हाँ" वो बोले, "एक माह आपने नज़र रखी?" मैंने पूछा, "हाँ, पूरे एक माह" वे बोले, "कोई गाँव है पास में?" म...
एक जगह खटिया बिछा कर लेट गए! अभी गर्मी कच्ची थी! कली जैसी, फूल नहीं बनी थी! नहीं तो नागफनी बन जाती! छुओ तो मरो, हटो तो बचो! और तभ...
अब सुबह पता चलना था! खैर साहब, सो गए हम फिर पाँव पसार के! ऐसी नींद आयी, कि सुबह ही नींद खुली! औ जब उठा, तो पेट में ज्वालामुखी उफन रह...
मदिरा इठला रही थी गिलास में! खिल्ली सी उड़ा रही थी! कर दिया काम तमाम! और फिर से एक और गिलास! सलाद! माछ! और वो चटनी! वाह! खट्टी, हर...
ताबड़तोड़ तीन गिलास खींच गए! बाबा को दिल्ली का ये कड़वा पानी बहुत रास आया! बहुत तारीफ़ की! और तभी, वही लड़की आयी, एक डलिया से लेकर, बाबा ...
और चले गए बाहर! जब आये, तो तीन गिलास, पानी, पानी का एक पूरा मटका ही उठा लाये थे! और पन्नी में बांधे हुए फल और सलाद! बैठ गए! गिलास...
और वैसे भी आम की बौर आयी हुई थी! बढ़िया! बहुत बढ़िया! और फिर हम हुए वापिस अब! बत्ती नहीं थी जी वहाँ अभी तक, खम्बे तो लगे थे, तार नहीं ...
