श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
Admin
Member
Joined: Apr 29, 2024
Last seen: Jun 30, 2026
Topics: 245 / Replies: 9255
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

हाँ, तो वो, आदमी आया, और फाटक खोला, "आओ" बाबा टेकचंद बोले, और हम अंदर चले! अंदर भी अँधेरा था बहुत! टेकचंद बाबा की टॉर्च का ही सहारा ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

हम हुए मुस्तैद! टेकचंद बाबा ने लगायी हांक एक! और कुत्ते शांत! अर्थात! जानते थे वे कुत्ते बाबा को अच्छी तरह! और बाबा की टॉर्च ने फिर से ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

"गाँव तो दूर है बहुत अभी" वे बोले, और मैं हुआ सन्न! "कितनी दूर?'' मैंने पूछा, "कोई बीस किलोमीटर" वे बोले, "तो यहाँ क्यों उतरे?" मैंने पूछा...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

कभी दायें हिलते, और कभी बाएं! और हाँ! रफ़्तार बरकरार रखी थी उसने! वो चार घंटे की यात्रा! ऐसी थी जैसे मंगल ग्रह की यात्रा! हम उतर गए! ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

छोटा सा क़स्बा था ये, अब पानी लिया सबसे पहले, फिर चाय, और साथ में कुछ गरमागरम पकौड़ियां भी! और चाय पीते पीते खाते चले गये! अब यहाँ से पकड़नी ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

घंटा बीता, और घोषणा हुई! गाड़ी आने वाली थी! हम हुए जी तैयार! आ गए प्लेटफार्म पर! और दूर से गाड़ी का इंजन दिखायी दिया! सुकून हुआ! गा...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

एक घंटे के बाद, धक्के खाते, पसीने बहाते, खाया-पिया पचाते, हिचकोले खाते, पहुँच गए एक स्टेशन! अब ये छोटा सा स्टेशन था! बड़ी गाड़ी रूक...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

चलते रहे! जूते भभक पड़े! कंकड़-पत्थर खिल्लियां उड़ाने लगे! सूरज क्रोध से, अपना ताप फेंकने लगे! सर पर तौलिया रखा था, पसीना आता, तो पोंछ ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

मैंने बुलाया उसको, और फिर मैंने कुछ रुपये उसको दिए! अनुभव क्र. ७९ भाग २ By Suhas Matondkar on Sunday, October 12, 2014 at 5:04pm उसने इंकार क...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

भरपेट खाना खाया! मजा आ गया! और फिर पसर गए हम! शाम को हमे निकलना था यहाँ से! शाम को थोड़ी ठंडक होती और फिर शहर पहुँच कर, कोई साधन मिल जात...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

मैंने थाली का कपड़ा हटाया, कटहल की सब्जी थी! दही, चटनी, और सलाद! साथ में दाल, साबुत उड़द की! और अचार! कच्चे पपीते का और आम का! छ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

वही नमकपारे! मजा आ गया! चाय में भी आनंद आ गया! और जी, फिर हुई दोपहर! और आया फिर भोजन! खुश्बू उड़ चली! मुझे तो संदेह हुआ उस लड़की पर...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

या बेसुध सोये, पता ही न चला! सुबह हुई, मैं गया निवृत होने, और फिर स्नान करके आया! तरोताज़ा हो गया! उस दिन मौसम बढ़िया हो गया था! हव...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

अखंड आनन्द!! भोजन कर लिया! मिर्च के मारे जीभ तालू से लगती ही न थी! नाक में हलचल मच गयी थी! रुमाल से साफ़ कर कर, नाक भी लाल हो चली थी! ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ कोलकाता से पहले एक स्थान की घटना

पेट ने मारी सीटी अब जैसे! मैंने झट से डलिया थामी! और कपड़ा हटाया! आहा! आज तो बड़ी और मोटी मोटी माछ थीं! कुल छह! खुश्बू ऐसी की सारी ही भसक...

2 years ago
Page 120 / 634
error: Content is protected !!
Scroll to Top