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कभी दायें हिलते, और कभी बाएं! और हाँ! रफ़्तार बरकरार रखी थी उसने! वो चार घंटे की यात्रा! ऐसी थी जैसे मंगल ग्रह की यात्रा! हम उतर गए! ...
छोटा सा क़स्बा था ये, अब पानी लिया सबसे पहले, फिर चाय, और साथ में कुछ गरमागरम पकौड़ियां भी! और चाय पीते पीते खाते चले गये! अब यहाँ से पकड़नी ...
घंटा बीता, और घोषणा हुई! गाड़ी आने वाली थी! हम हुए जी तैयार! आ गए प्लेटफार्म पर! और दूर से गाड़ी का इंजन दिखायी दिया! सुकून हुआ! गा...
एक घंटे के बाद, धक्के खाते, पसीने बहाते, खाया-पिया पचाते, हिचकोले खाते, पहुँच गए एक स्टेशन! अब ये छोटा सा स्टेशन था! बड़ी गाड़ी रूक...
चलते रहे! जूते भभक पड़े! कंकड़-पत्थर खिल्लियां उड़ाने लगे! सूरज क्रोध से, अपना ताप फेंकने लगे! सर पर तौलिया रखा था, पसीना आता, तो पोंछ ...
मैंने बुलाया उसको, और फिर मैंने कुछ रुपये उसको दिए! अनुभव क्र. ७९ भाग २ By Suhas Matondkar on Sunday, October 12, 2014 at 5:04pm उसने इंकार क...
भरपेट खाना खाया! मजा आ गया! और फिर पसर गए हम! शाम को हमे निकलना था यहाँ से! शाम को थोड़ी ठंडक होती और फिर शहर पहुँच कर, कोई साधन मिल जात...
मैंने थाली का कपड़ा हटाया, कटहल की सब्जी थी! दही, चटनी, और सलाद! साथ में दाल, साबुत उड़द की! और अचार! कच्चे पपीते का और आम का! छ...
वही नमकपारे! मजा आ गया! चाय में भी आनंद आ गया! और जी, फिर हुई दोपहर! और आया फिर भोजन! खुश्बू उड़ चली! मुझे तो संदेह हुआ उस लड़की पर...
या बेसुध सोये, पता ही न चला! सुबह हुई, मैं गया निवृत होने, और फिर स्नान करके आया! तरोताज़ा हो गया! उस दिन मौसम बढ़िया हो गया था! हव...
अखंड आनन्द!! भोजन कर लिया! मिर्च के मारे जीभ तालू से लगती ही न थी! नाक में हलचल मच गयी थी! रुमाल से साफ़ कर कर, नाक भी लाल हो चली थी! ...
पेट ने मारी सीटी अब जैसे! मैंने झट से डलिया थामी! और कपड़ा हटाया! आहा! आज तो बड़ी और मोटी मोटी माछ थीं! कुल छह! खुश्बू ऐसी की सारी ही भसक...
घड़ा, तीन गिलास, एक मग, एक कपडे का झोला, एक छुरी, ले आये, थैला पकड़ा मैंने, और निकाला सामान, इसमें वही, टमाटर, प्याज, खीरा, चुकं...
"टेकचंद? ये रहने वाले हैं बहराइच के, फिर रहे गोरखपुर में, कई साल, फिर बाबा शम्भू नाथ के संपर्क में आये, बहुत कुछ जानते हैं, अब यहीं रह रहे हैं, इनका प...
डेढ़ घंटा! पूरे डेढ़ घंटे हमने नींद ले मारी! मजा आ गया! अब वो पलंग और गद्दे क्या मजा देते! जो इस भूमि ने दिया था! पसीना नहि आया एक बूँद भ...
