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पर मिठाई चढ़ाता है! हर अवसर में न्योता देता है! उसके बाद वहाँ कभी कोई समस्या नहीं हुई, काम स्थायी हो गया! आज शील और उसका पूरा परिवार सुख से वहाँ रह रहा...
"हाँ ये तेरा नहीं है, मेरा है! जब वो सोना तोल रहे थे तो मैंने सोने के तराजू वाले प्याले के नीचे ऊँगली रख दी थी,, जिस से ये साढे ७ ग्राम फ़ालतू हो गया" ...
जायेंगे और कब काम करवाएंगे? किसी की शादी का जेवर बनाना है, परसों देना है, आज का दिन तो गया, कल कारीगरों की छुट्टी है, मेरा तो सत्यानाश कर दिया तुमने?"...
"यहीं एक लाला जी हैं, वहीँ देता हूँ, आदमी भले हैं, जो दे देते हैं उसी में गुजारा हो जाता है" धाम चंद ने कहा, "एक बात कहूँ? मानोगे? वो बोले, धाम चं...
सो रही थी, उसने सोचा कोई कुत्ता जानवर आदि होगा, उसने अन्दर आके दरवाज़ा बंद कर लिया, थोड़ी देर बाद दरवाज़े पर दस्तक हुई, एक बार, दो बार, फिर तीसरी बार भी,...
परिवार सहित रहा करता था, हम नहाए-धोये, चाय-आदि लिया, और थोडा आराम करने के लिए लेट गए, शील ने खाने कि तैयार करवा ली थी, मैंने अगले दिन सुबह फैक्ट्री जा...
और नवीन किसी तरह की भी कोताही नहीं बरती गयी थी, आग लगने का कारण अभी भी अज्ञात था, तब किसी ने किसी ओझा-तांत्रिक का सुझाव दिया, उसको भी बुलाया गया, उसने...
अब उसे मेरा सामर्थ्य पता चल गया था! "वो देख! वो लड़का तेरा मारा हुआ है, जा उसको ठीक कर दे! वापिस ले ले अपना प्रहार!" मैंने उस से कहा और मोहन की ओर इश...
"क्या हुआ इन्द्राल?" मैंने पूछा और मुस्कुराया! "तू है कौन??'' उसने गुर्रा के पूछा! "बताया ना कि मै चांडाल कित्रांग हूँ!" मैंने कहा, "नहीं! झूठ ब...
अर्थात तेरे जैसे साधक का रक्त मीठा होता है! मै चाहता तो उस डाकिनी को ऐसा पाठ पढाता कि दुबारा मेरे सामने नहीं आती! परन्तु मुझे इन्द्राल को हाज़िर करवा...
अब मैंने अपनी अलख उठायी! अलख भोग समर्पित किया! भोग-थाल सम्मुख रखे! और यम-रूढ़ा का जाप किया! आधा घंटा बीता! वातावरण में परिवर्तन आ गया! वायु-संचार थम गय...
रोज हम स्वयं वहाँ आयेंगे और उस मोहन को देखेंगे! किशोर ने ये बात मोहन के माँ बाप को बता दी थी, वे भी तैयार हो गए हो फिर लगातार फ़ोन करते रहे! बेचारे तड़प...
उसका हाल जानने के लिए कहा उसका प्रेत भयभीत हो गया! वो डाकिनी यम-रूढ़ा का नाम नहीं ले सकता था! अतः चुप हो गया! तांत्रिक समझ गया कि कोई बहुत ही विकट समस्...
"कौन है तू?" डाकिनी ने फिर गरज के पूछा, मोहन मारे भय के काँप गया! मंत्रोच्चार टूट गया! "कौन है तू?" अब डाकिनी ने क्रोध से पूछा, आँखें फैला के कहा!...
