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अब मैं क्या कहता! वहाँ से चला आया! सीधा शर्मा जी के पास! "क्या हुआ?" उन्होंने पूछा, "इसने तो ठान लिया है!" मैंने कहा, "मरना?" उन्होंने ...
उसने अपने उत्तर से मुझे चौंका दिया! सच में! "धन के लिए साधोगी?" मैंने पूछा, "नहीं, लक्ष्य के लिए!" उसने कहा, "कैसा लक्ष्य?" मैंने पूछा, "ज...
"तारा! तारा बोलो!" उसने कहा, वाह! एक और दम्भी रूप! "हाँ! तारा!" मैंने कहा, "अब बोलो?" उसने कहा, "ये नहीं सोचा कि वो डोरा डाला किसने होगा?"...
"महासिद्ध वीर!" मैंने कहा, ''तो क्या हुआ?" उसने कहा, "अब जो मैं कहता हूँ, ध्यान से सुनना! तुम मृत्यु के पालने में झूल रही हो तारा! बेहतर होगा कि य...
मैं कैसे जानूं अष्ट-वीर! "आपने साधे हैं?" उसने मुझसे ही पूछा! "हाँ! इसीलिए कहा बहुत खतरा है!" मैंने कहा, "हम अष्ट-वीर ही साधेंगे यहाँ!" उसने कहा...
"डोरा कौन सा है?" मैंने पूछा, "क्षेत्रपाल का" उसने मुझे घूरते हुए कहा! "मणिभद्र क्षेत्रपाल का?" मैंने पूछा, "हाँ!" उसने कहा, अब ये बहुत, बहुत ...
इसके बाद सोहन जी उठ गए वहाँ से और अपनी दैनिक-कर्म के लिए चल पड़े! रह गए हम सो हमने वहाँ पड़ी कुछ पुरानी पत्रिकाएं पढ़नी शुरू कर दीं, कुछ पुरानी निरोगधाम ...
''दांव खेल है बाबा खेमचंद ने! अँधा दांव!" वे बोले, "हाँ, इसमें कोई शक़ नहीं!" मैंने कहा, अब सोहन जी आये वहाँ, साथ में प्रसाद आदि भी ले आये थे, बैठ ...
"तारा? कितने बजे है क्रिया?" मैंने पूछा, "रात्रि साढ़े बारह" उसने बताया, "अच्छा!" मैंने कहा, "हाँ, आप बैठेंगे?" उसने फिर से पूछा, "नहीं तारा!" ...
"सोहन जी, अब तो दिन फिरने वाले हैं आपके!" मैंने कहा, "कैसे गुरु जी?" उन्होंने पूछा, "तारा जी यहाँ से अकूत धन निकालने वाली हैं, अब लड्डू फूटेगा तो ...
"जैसा आप कहें" मैंने कहा, तभी तारा का फ़ोन बजा, उसने फ़ोन उठाया और किसी से बात करनी शुरू की, कुछ देर, फिर फ़ोन काट दिया, और भूरा से कुछ बातें करने लगी,...
"तब तो आपने बड़ी भूल की!" उसने कहा, भूल! भूल तो वो स्वयं करने जा रही थी! मैं क्या उत्तर देता! फिर भी! फिर भी! मैंने जानना चाहा कि उसकी नज़र में ...
"आपने निकाला है कहीं?" उसने पूछा, "हाँ" मैंने कहा, और ये बोलकर जैसे मैंने कोई धमाका कर दिया! "कितना?" उसने पूछा, भूरा भी ऐसे देखने लगा जैसे को...
"आप क्रिया में बैठो, पता चल जाएगा" उसने कहा, 'नहीं, मैं अभी क्रिया में नहीं बैठूंगा" मैंने कहा, "तो ऐसा नहीं बोलिये" उसने कहा, कहा या डांटा! शाय...
"अच्छा, तब तो वहाँ बरसात का सा मौसम रहता है, बहुत कम ही बाहर आना जाना हो पाता है" वो बोली, "हाँ, ऐसा हो सकता है" मैंने कहा, अब उसने बाबा भूरा को क...
