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उसने फिर तारा को देखा! और मैंने भूरा का हाथ पकड़ा अब! "चल मेरे साथ?" मैए उसको खींचते हुए कहा, वो खिंचा और फिर दूसरे हाथ से मेरा हाथ हटा दिया! ...
उसको देखा! "क्या हुआ साध्वी?" मैंने पूछा, किसी अंदेशे से मेरा मन डरा! "क्या हुआ?" मैंने पूछा, वो शान्त सी बैठी रही! सामने देखते हुए! "अ...
क्या मिथ्या है ये न समझी वो! उन्होंने दया-दृष्टि दिखायी थी! समझ जाना चाहिए था इसको! नहीं समझी! "अब जाओ यहाँ से!" फिर से स्वर गूंजा! और ...
पुत्री! अब तो समझ लेती वो! "कौन हो बाबा आप?" साध्वी ने पूछा, "हरदेव!" स्वर गूंजा! बाबा हरदेव! अब मुझसे रहा न गया! मैं खड़ा हुआ और उनम...
"तारा! मान जाओ उनकी बात, चलो यहाँ से" मैंने कहा, नहीं सुना फिर भी उसने! वो तो जैसे खूंटा गाड़ के बैठी थी वहाँ! ''साध्वी? हम सब मारे जायेंगे!" ...
उनका वार्तालाप किस समय उलझ जाता, पता नहीं चल रहा था, बस आभास था, कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए! मेरे हाथ मेरे त्रिशूल पर कसते चले गए! उस भूमि का सेवक ...
"जा लौट जा!" वो बोला, "लौट जाऊं? क्यों?" उसने पूछा, "बालिका!" वो कह कर हंस पड़ा! बालिका! हाँ! वो बालिका ही तो थी उनके सामने! क्या बिसात!...
कहाँ डूबेंगे कुछ नहीं पता! "तारा?" मैंने फिर से फुसफुसाया! कोई ध्यान नहीं दिया उसने! अब वो बैठी! एक टुकड़ा लिया मांस का, अलख को छुआया और फिर ए...
यहाँ हम फंस गए थे! उठ सकते नहीं थी, डोरे के मध्य थे! और डोरा खींचे वाले सामने थे! अब केवल क्षमा-याचना से ही बात बन सकती थी! और वो, ये मान ...
मैं चौंका! वे चुप खड़े रहे! "उत्तर दो?" उसने फिर से कहा, अब तक भूरा खड़ा हो गया, उसने कुछ नहीं दिख रहा था, वो भाग कर तारा के पीछे आ खड़ा हुआ! ...
कोई उत्तर नहीं! "तारा?" मैंने कहा, कोई प्रतिक्रिया नहीं! "तारा? उठो?" मैं घबरा के बोला! कोई जवाब नहीं! "तारा?'' मैंने फिर से पुकारा! ...
कोई तो था? कोई तो? लेकिन कौन? साध्वी इस से अनभिज्ञ थी, वो तो फिर से स्तम्भन कर सारा धन एकत्रित करना चाहती थी! उसन एस विषय में ध्यान नहीं दिया...
उसने मुझे कटाक्ष भरी निगाहों से छलनी कर दिया! सही में मित्रगण! "भूरा?" उसने पुकारा! भूरा सामने आया! "जाओ! और लेकर आओ!" उसने कहा, भूरा ने स...
ये क्या किया उसने? स्तम्भन? वीर-स्तम्भन? क्या ऐसा सम्भव है? अब मैं भी उलझा! ये कैसे? क्या कर दिखाया था उसने? और तभी मैंने देखा! ...
तभी मेरे सामने की हर वस्तु घूमने लगी! जैसे घूम घूम के एक केंद्र में समाती जा रही हो, मुझे मतिभ्रम नहीं हुआ था, वो वास्तविक था! मैं थोडा सा घबराया और उ...
