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उसके बाद हम वहाँ से उठे, निकले और राजेश के घर आ गए...........वापिस....... रात्रि-समय भोजन पश्चात् मै और शर्मा जी इस विषय पर विचार कर रहे थे, एक तरह से...
ये तो गान्धर्व-पुरी थी! शापित गन्धर्वों की पनाहगाह! वहाँ के प्रत्येक वृक्ष पर मोटे-मोटे सर्प लिपटे हुए थे! गन्धर्व और गंधर्व-कन्यायों का मिलन-स्थल! ...
"नहीं गुरु जी, साधारण तो कतई भी नहीं" उन्होंने कहा, "तो फिर कौन सा जिंदा रह सकता है?" मैंने पूछा, "अगर वो मायावी है या दैवीय है तो जिंदा रह सकता ह...
कोई तीन महीने बाद, तारा को दौरा पड़ा और उसी दौरे में उसके प्राण-पखेरू उड़ गए! मुझे बहुत दुःख हुआ! बहुत दुःख! मैं उस तारा को आजतक नहीं भूल पाया हूँ! आजतक...
सुबह सात बजे, मुझे शर्मा जी ने जगाया, मैं जाग, घड़ी देखी, सात बजे थे, हम अपने स्थान पहुँच चुके थे, शर्मा जी ने मेरा सामान उठाया और हम अपने स्थान में प्...
मैंने अपना चिमटा उठाया, अपना वो कपाल उठाया और फिर अपना त्रिशूल सम्भाला, और फिर उन दोनों को देखा! "जाओ! चढ़ो बलि!" मैंने कहा, और मैं वहाँ से वापिस...
"भूरा? सोच ले?" मैंने कहा, उसने अनसुना कर दिया! अब उस साधिका ने मुझे अपशब्द कहे! कटु-शब्द! अत्यंत कटु-शब्द! मेरे बर्दाश्त से बाहर हाउ ये सब और म...
"सुन साधक! मैंने समझाया, यहाँ कुछ नहीं तुम्हारे लायक, अब जाओ!" वो बोला, बात तो सही थी! मैंने इंकार नहीं किया, बस गर्दन नीचे झुकला ली अपनी! कुछ प...
मैंने आकाश को देखा! वो जस का तस था! फिर सामने देखा, सामने बाबा किरपाल त्रिशूल लिए खड़ा था, इस से पहले उसके हाथ में त्रिशूल नहीं था! वो अब वार करन...
बहुत! छेद हो जाते हैं, यदि जीवित रहे भी तो सदैव रिसते रहते हैं! इसको भर्दन-क्रिया कहा जाता है! आज से तीन-चार सौ वर्ष पहले ये क्रिया हुआ करती थी, इसके ...
उसके साथ हूँ! मैंने जो सोचा था वही कर रहा था मैं, मैं इस साध्वी को जीवित रहने देना चाहता था और यही लक्ष्य था इस समय! अब साध्वी ने अमूमाक्ष-मंत्र पढ़...
उसने फिर तारा को देखा! और मैंने भूरा का हाथ पकड़ा अब! "चल मेरे साथ?" मैए उसको खींचते हुए कहा, वो खिंचा और फिर दूसरे हाथ से मेरा हाथ हटा दिया! ...
उसको देखा! "क्या हुआ साध्वी?" मैंने पूछा, किसी अंदेशे से मेरा मन डरा! "क्या हुआ?" मैंने पूछा, वो शान्त सी बैठी रही! सामने देखते हुए! "अ...
क्या मिथ्या है ये न समझी वो! उन्होंने दया-दृष्टि दिखायी थी! समझ जाना चाहिए था इसको! नहीं समझी! "अब जाओ यहाँ से!" फिर से स्वर गूंजा! और ...
